यह घटना बिहार में राजनेताओं और उनके परिवार के सदस्यों के साथ ऐसी घटनाओं की लंबी श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले 2023 में पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज से बीजेपी विधायक रश्मि वर्मा के अपहरण की घटना ने सुर्खियां बटोरी थीं। अपहरणकर्ताओं ने 2 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। हालांकि, विधायक के परिजनों ने किडनैपरों के चंगुल से उन्हें छुड़वा लिया और इस मामले में केस दर्ज किया गया।
2024 में, बेगूसराय के मटिहानी विधानसभा से जदयू विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह के बेटे सुभन सौरभ का भी अपहरण किया गया था। पुलिस ने सात घंटे की गहन खोजबीन के बाद सुभन को एक होटल से सुरक्षित बरामद कर लिया।
इतना ही नहीं, 2005 में बिहार के श्रम मंत्री संतोष सिंह ने अपने बेटे के अपहरण का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि राष्ट्रीय जनता दल के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे फिरौती मांगी थी।
मौजूदा घटना में विभूति यादव के लापता होने के मामले ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि उनकी तलाश के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। परिवार और स्थानीय लोग इस घटना से बेहद चिंतित हैं और विभूति के सुरक्षित मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।





