सुप्रीम कोर्ट में विवाद की सुनवाई
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले में केंद्र सरकार और 800 से अधिक अधिकारियों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। आज सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई होनी है।
यह याचिका केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के अधिकारियों द्वारा दायर की गई है। इनमें कुछ अधिकारी शौर्य चक्र और कीर्ति चक्र जैसे वीरता पुरस्कारों से सम्मानित हैं।
अधिकारियों की आपत्ति और आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले को निरस्त करने के लिए यह नया कानून बनाया है, जिसमें CAPF में IPS अधिकारियों की डेपुटेशन को चरणबद्ध तरीके से कम करने का आदेश दिया गया था। इस याचिका का नेतृत्व CRPF के शौर्य चक्र विजेता असिस्टेंट कमांडेंट विभोर कुमार सिंह कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि शीर्ष पदों पर बाहरी IPS अधिकारियों की सीधी तैनाती से उन कैडर अधिकारियों के प्रमोशन के रास्ते बंद हो जाते हैं, जिन्होंने वर्षों तक अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा की है। नए कानून में महानिदेशक (DG) और विशेष महानिदेशक (SDG) पर 100 प्रतिशत IPS अधिकारियों की तैनाती का प्रावधान है, जिससे कैडर अधिकारियों के लिए बल का प्रमुख बनना मुश्किल हो गया है।
CAPF का मुख्य कार्य
CAPF अधिकारियों का मानना है कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी देश की सीमाओं की सुरक्षा, आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटना है, जिसके लिए विशेष सैन्य प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। वहीं, IPS अधिकारियों का मुख्य अनुभव राज्यों में कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग तक सीमित है।
इस संदर्भ में, अधिकारियों ने यह भी कहा कि नए कानून से उनके कार्यक्षेत्र और सामर्थ्य में अवरोध उत्पन्न होगा।
सरकार का पक्ष
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अदालत में 77 पन्नों का हलफनामा पेश कर इस कानून का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि संसद को कानून में बदलाव करने का पूरा अधिकार है और नया कानून सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को बदलता है, जो अदालत के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि IPS अधिकारी राज्य और केंद्र के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं, और CAPF अभियानों के बेहतर समन्वय के लिए उनके शीर्ष पदों पर मौजूद रहना आवश्यक है।
IPS अधिकारियों का अनुभव
सरकार ने यह तर्क भी खारिज किया है कि IPS अधिकारियों के पास सुरक्षा अभियानों का अनुभव नहीं होता। इसके अनुसार, IPS अधिकारी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, सीमावर्ती जिलों और खुफिया एजेंसियों में भी अपनी सेवाएं देते हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि इस कानून को संसद के दोनों सदनों से पारित करने के बाद 8 अक्टूबर को अधिसूचित किया गया था।





