कांग्रेस सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में यौन दुर्व्यवहार के आरोपों से घिरे कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम की स्थिति गंभीर होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेगा, जिसमें अकोइजम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की जाएगी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रूपा कुमारी चौधरी करेंगी, जिनके साथ सांसद डी. पुरंदेश्वरी भी उपस्थित रहेंगी।
विश्वविद्यालय ने की कार्रवाई
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने पिछले सप्ताह बिमोल अकोइजम को प्रोफेसर के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया था। मणिपुर से कांग्रेस सांसद अकोइजम के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार की कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच में उन्हें यौन उत्पीड़न और अनुचित आचरण का दोषी पाया गया। विश्वविद्यालय ने इस मामले की जांच यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून (POSH Act) के तहत की थी।
बीजेपी सांसदों ने राष्ट्रपति से की थी मुलाकात
बीजेपी सांसदों ने कांग्रेस सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात की थी। पार्टी का स्पष्ट अनुरोध है कि कांग्रेस अपने सांसद के खिलाफ उचित कदम उठाए और उन्हें पार्टी से निष्कासित करे। अब भाजपा की महिला सांसद ओम बिरला के समक्ष यह मुद्दा उठाने की तैयारी कर रही हैं।
दिल्ली पुलिस ने किया मामला दर्ज
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भी कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों में मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई 11 अक्टूबर को JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत के बाद की गई।
शिकायतों में गंभीर आरोप
छात्राओं द्वारा की गई शिकायतों में अकोइजम पर आरोप लगाया गया है कि वह उन्हें शैक्षणिक बैठकों के बहाने अपने आवास पर बुलाते थे, जहां ये बैठकें देर रात तक चला करती थीं। इनमें बिना सहमति शारीरिक निकटता बनाने और अनुचित टिप्पणियाँ करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। हालांकि, सांसद ने इन सब आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम बताया है और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
शिक्षक संघ की प्रतिक्रिया
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (JNUTA) ने रविवार को अकोइजम को पद से हटाए जाने के निर्णय की आलोचना की थी। शिक्षक संघ ने इस कार्रवाई को जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताते हुए इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।





