इसके साथ ही, 2:1 के बहुमत से उन्हें राहत मिली और इस फैसले के बाद उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।
यह मामला अयोध्या के महाराजगंज थाने का है, जहां 2010 में विकास सिंह ने अभय सिंह और उनके साथियों पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया था। शुरुआत में यह मामला अम्बेडकर नगर कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था। 10 मई 2023 को अम्बेडकर नगर की कोर्ट ने अभय सिंह और उनके अन्य साथियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ विकास सिंह ने हाईकोर्ट में अपील की थी। यहां पर दो न्यायाधीशों की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई थी, और फैसले के बंटने के बाद तीसरे न्यायाधीश ने इस मामले में अभय सिंह को दोषमुक्त कर दिया। अब इस फैसले के बाद अभय सिंह को बड़ी राहत मिली है।
अभय सिंह, जो कि अयोध्या की गोसाईगंज सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार के तौर पर विधायक बने थे, ने राज्यसभा चुनाव के दौरान सपा से बगावत करते हुए भाजपा के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद से वह सपा के बागी विधायक के तौर पर जाने जाते हैं। इसके बावजूद, सपा ने उनकी सदस्यता को लेकर कोई कार्यवाही नहीं की है और वह तकनीकी रूप से सपा के विधायक ही बने हुए हैं। लेकिन, लोकसभा चुनाव और अन्य कई अवसरों पर वह भाजपा के नेताओं के साथ नजर आते हैं, जिससे यह साफ है कि उनका सपा से जुड़ाव अब काफी कमजोर हो चुका है।
इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठता है कि क्या सपा को अब अपने बागी विधायकों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाना चाहिए, क्योंकि यह मामला उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल को लेकर कई नए सवाल खड़े करता है।
अभय सिंह का यह कदम और उनका भाजपा से रिश्ते बढ़ाना सपा के लिए एक चुनौती बन चुका है, खासकर आगामी चुनावों को लेकर। वहीं, यह भी देखा जाएगा कि अब इस मामले के बाद अभय सिंह की राजनीतिक दिशा और उनकी पार्टी से जुड़ी भविष्य की योजनाओं पर क्या असर पड़ता है।
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