शशि थरूर का बयान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन में 'रिजीम चेंज' शब्द ने राजनीतिक विवाद उत्पन्न कर दिया है। इस संदर्भ में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इमरजेंसी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री उस समय को उखाड़ फेंकने की बातें करते हैं, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि विपक्ष ने उस समय भी लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन किया था।
आरोपों का खंडन
NDTV के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, थरूर ने उन आरोपों को नकारा, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मौजूदा प्रदर्शन राष्ट्र विरोधी हैं और उन्हें विदेशी शक्तियों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, "पीएम मोदी अक्सर आपातकाल और उसके अंत की चर्चा करते हैं। यह कैसे समाप्त हुआ? विपक्ष के संयुक्त प्रयासों के जरिए, जिसमें संघ, भाजपा, समाजवादी और वामपंथी शामिल थे, आपातकाल लगाने वाली सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखायी गई थी।"
हिंसक प्रदर्शनों की संभावना पर टिप्पणी
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में फ्रांस जैसे हिंसक प्रदर्शनों की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा, "हमारे संविधान और कानूनों ने स्पष्ट रूप से शांतिपूर्ण प्रदर्शन और विरोध का अधिकार सुनिश्चित किया है, लेकिन इसमें हिंसा का कोई स्थान नहीं है।" थरूर ने जोर देकर कहा कि भारत के राजनीतिक संदर्भ में फ्रांस में हुई घटनाओं को किसी भी प्रकार से सही नहीं ठहराया जा सकता।
रिजीम चेंज का विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान यह कहा कि वे रिजीम चेंज करना चाहते हैं। इससे पहले, AISA की प्रमुख नेहा बोरा ने भी बांग्लादेश में शेख हसीना को हटाने वाली क्रांति से प्रेरणा लेने की बात की थी। इन बयानों के बाद, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर हमले तेज कर दिए, यह आरोप लगाते हुए कि विपक्ष और वामपंथी संगठन देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं। कांग्रेस ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन करना है, न कि हिंसा के माध्यम से।





