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सेना की भविष्य की चुनौतियों के लिए रणनीतिक तैयारी जरूरी: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।

सेना की भविष्य की चुनौतियों के लिए रणनीतिक तैयारी जरूरी: राजनाथ सिंह
फोटो: Strategic Preparation Essential for Future Challenges: Rajnath Singh

भविष्य की चुनौतियों के लिए रणनीतियों का निर्माण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे आगामी 20 से 30 वर्षों में आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखकर रणनीतियों का निर्माण करें। उन्होंने भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान देने के साथ-साथ सेना को वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। शुक्रवार को नई दिल्ली में सेना कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुसार सैन्य रणनीतियों में आवश्यक बदलाव करते रहना चाहिए।


सीमा पर तनाव के मद्देनजर, राजनाथ सिंह ने कहा, 'सेना की तैयारी इस प्रकार होनी चाहिए कि वह तत्काल उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य में आने वाले खतरों का भी प्रभावी तरीके से सामना कर सके।'


ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का महत्व

राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलती परिस्थितियों के अनुसार सेना की तैयारी, नवीन सोच, बेहतर तालमेल और आधुनिक हथियारों के समुचित उपयोग ने इस ऑपरेशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने में पीछे नहीं हटेगा।


रक्षा मंत्री ने सेना में हो रहे परिवर्तनों और ड्रोन सहित आधुनिक तकनीक के प्रयोग की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सेना को अपनी क्षमताओं का निरंतर आकलन करना चाहिए और आवश्यकतानुसार उनमें सुधार करना चाहिए।


आधुनिक तकनीकों का उपयोग और थलसेना की भूमिका

राजनाथ सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोनॉमस सिस्टम, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और सुरक्षित संचार नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में तेजी से कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हवाई, समुद्री, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में चुनौतियाँ बढ़ रही हैं, लेकिन जमीनी युद्ध और थल सेना की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनी रहेगी।


उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध में सफलता के लिए सेना की विभिन्न इकाइयों और सभी सैन्य क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। इसके अलावा, उन्होंने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।


रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की प्राथमिकता

रक्षा मंत्री के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 38,000 करोड़ रुपये के अब तक के उच्चतम स्तर पर रहा।


उन्होंने वर्ष 2025 को सुधारों का वर्ष बताते हुए कहा कि सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसका असली लाभ तभी मिलता है जब उन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने सेना के कमांडरों से अपने-अपने कमान क्षेत्रों में इन सुधारों को आगे बढ़ाने और उन्हें सैन्य क्षमताओं तक पहुंचाने का निर्देश दिया। साथ ही, बेहतर मानव संसाधन प्रबंधन, सेना में महिलाओं की अधिक भागीदारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एकीकृत रणनीति पर जोर दिया।