विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण
अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हालिया झड़प के संदर्भ में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के प्रमुख शत्रुजीत कपूर के बयान पर उठे विवाद पर विदेश मंत्रालय ने सीधे कोई टिप्पणी नहीं की। हालांकि, मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएँ कभी-कभी होती हैं और इसके लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया गया है। इसके साथ ही, मंत्रालय ने चीन की सेना द्वारा तय गश्त के तरीकों से भटकने के कारण सीमावर्ती इलाकों में होने वाली अशांति का उल्लेख किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्ष 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर चल रहे मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्य तंत्र का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "जब चीनी सेनाएँ तय गश्त के तरीकों से भटक जाती हैं, तो ऐसे में सीमावर्ती इलाकों में अशांति उत्पन्न होती है।"
ITBP की नई 'शौर्य कमांडो' यूनिट
यह बयान उस समय आया है जब ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बताया कि उनकी द्वारा गठित 'शौर्य कमांडो' यूनिट ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ चल रहे आमना-सामना के दौरान अपनी क्षमताएँ प्रदर्शित की हैं। कपूर ने बताया कि हर सीमा बटालियन में कमांडो तैनात किए जाएंगे, जिससे बल की युद्ध-तैयारी को मजबूती मिलेगी।
ITBP प्रमुख ने यह भी कहा कि यह बल चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी LAC पर अपनी आधुनिकता को बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उनका यह बयान उस समय आया है जब बल अपनी आधुनिकीकरण प्रक्रिया को तेज कर रहा है, जिसमें नई युद्ध तकनीकों और विशेष प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
गुरुवार को, ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले, कपूर ने राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि युद्ध के पारंपरिक तरीके अब चीन का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने चीन को भारत का "सबसे बड़ा विरोधी" बताया और कहा, "पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल में कई जगहों पर आमना-सामना हुआ है, जो अभी भी जारी है।"
उनके इस बयान के बाद, विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाया है, आरोप लगाते हुए कहा है कि मोदी सरकार चीन के दबाव में झुक रही है।





