सचदेवा ने कहा,
"केजरीवाल हमेशा यह दावा करते रहे हैं कि उनकी आय का मुख्य स्रोत विधायक का वेतन है। बावजूद इसके, 2020-21 में उनकी आय 44,90,040 रुपये तक पहुंच गई, जो 2019-20 में केवल 1,57,823 रुपये थी। आखिर ऐसा कैसे हुआ?"
सचदेवा ने इसे गंभीर विसंगति बताते हुए कहा कि कोविड महामारी के दौरान, जब देश आर्थिक संकट का सामना कर रहा था, तब केजरीवाल की आय में इतना बड़ा उछाल हैरान करने वाला है।
शराब नीति और अन्य मुद्दों से जोड़ा
बीजेपी नेताओं ने इस आय वृद्धि को दिल्ली की विवादित शराब नीति से जोड़ते हुए पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा,
"शायद यह शीशमहल की खुदाई से मिला खजाना है।" बीजेपी के मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह केवल आरोप लगाने का विषय नहीं है, बल्कि जनता के सामने उठे सवालों का जवाब मांगा जा रहा है।
उन्होंने कहा,
"केजरीवाल को 2013-14 से लेकर 2024-25 तक अपनी घोषित आय और वास्तविक आय के बीच के अंतर को स्पष्ट करना चाहिए।"
कपूर ने यह भी कहा कि 2013-14 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से 2024 तक विधायक और मुख्यमंत्री के रूप में वेतन प्राप्त करने के बावजूद उनकी आय में इतने बड़े अंतर की वजह स्पष्ट नहीं है। बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल से पारदर्शिता बरतने और जनता के सवालों का जवाब देने की मांग की है। यह मुद्दा चुनावी माहौल को और गरमाने का संकेत दे रहा है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि केजरीवाल इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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