पत्रकारों की हिरासत, प्रदर्शनकारियों से कथित मारपीट और पुलिस की निष्पक्षता पर बहस
दिल्ली में 2 अक्टूबर से जारी विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पुलिस की कार्रवाई, पत्रकारों की हिरासत और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पत्रकारों के एक समूह ने अपने अनुभव साझा करते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल पर पुलिस का रवैया निष्पक्ष नहीं था और स्वतंत्र पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने से रोका गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के मार्च के बाद राहुल गांधी ने कथित पुलिस बर्बरता के पीड़ितों से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। पीड़ितों ने हिरासत के दौरान फोन छीने जाने, गाली देने और मारपीट के आरोप लगाए। एनएसयूआई कार्यकर्ता ऋतु बराला ने पुलिस की कार्रवाई की तुलना अंग्रेजों द्वारा गरीबों और मजदूरों के शोषण से की। समर्थ ने आरोप लगाया कि करीब 20 पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीटा, जबकि अर्जुन ने सीने और निजी अंगों पर लात मारने तथा गला दबाने का दावा किया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं कराई गई।
पत्रकार गीतांजलि ने बताया कि कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल में एक संदिग्ध सफेद गाड़ी की जांच की मांग करने पर पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उनका फोन पटक दिया। पत्रकारों का दावा था कि गाड़ी में लाठियां देखी गई थीं और बाद में उससे डंडे निकालते हुए वीडियो सामने आया। दिल्ली पुलिस ने अगले दिन गाड़ी की जांच करने और उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिलने की बात कही थी।
पत्रकार निवेदिता ने आरोप लगाया कि 4 अक्टूबर को बेहोश लड़कियों को भी हिरासत में लिया गया और उन्हें पर्याप्त महिला पुलिसकर्मी नजर नहीं आईं। वहीं, पत्रकार हरीश ने स्वतंत्र पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा और अन्य पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने का घटनाक्रम साझा किया। उनके मुताबिक, पत्रकारों ने पहचान-पत्र पहन रखे थे और प्रदर्शनकारियों से दूरी बनाए रखते हुए रिपोर्टिंग कर रहे थे।
चर्चा में रमित के साथ कथित मारपीट, हिरासत के दौरान फोन छीने जाने और आम नागरिकों को भी उठाए जाने के आरोपों का जिक्र हुआ। पत्रकारों ने पुलिस की शपथ, संवैधानिक जिम्मेदारी और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटनाओं को रिकॉर्ड करना और सत्ता से जवाब मांगना पत्रकारिता का हिस्सा है, न कि महज एक्टिविज्म।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि पुलिस की जवाबदेही संविधान और जनता के प्रति है। उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया।





