राजे पर गहलोत का पलटवार, अच्छा होता सीएम रहते आपने रिफाइनरी पर हमारी जैसी ही भावना दिखाई होती
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राजे पर गहलोत का पलटवार, अच्छा होता सीएम रहते आपने रिफाइनरी पर हमारी जैसी ही भावना दिखाई होती

By Bhaskar calender  02-Sep-2019

राजे पर गहलोत का पलटवार, अच्छा होता सीएम रहते आपने रिफाइनरी पर हमारी जैसी ही भावना दिखाई होती

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच ने ट्वीटर वार चल रहा है। पहले पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने ट्वीटर पर लिखा कि 2013 में कांग्रेस ने पत्थर तो लगा दिया, लेकिन उसके अलावा कागजी कार्यवाही तक करना आवश्यक नहीं समझा। हमारी भाजपा सरकार ने तो तीन साल में नया एमओयू कर काम भी शुरू कर दिया था। सीएम अशोक गहलोत ने शनिवार को स्टेट डाटा सेंटर की तारीफ की, जिस पर वसुंधरा राजे ने धन्यवाद किया। वसुंधरा के इन दाेनों ट्रवीट पर गहलोत ने रविवार को पलटवार किया। कहा कि अच्छा होता कि मुख्यमंत्री रहते हुए रिफाइनरी के लिए हमारी जैसी ही भावना दिखाई होती तो चार साल का समय बरबाद नहीं होता।
राजे ने जयपुर में बने ‘टेक्नो हब’ के लिए तत्कालीन भाजपा सरकार के काम की गहलोत की ओर से सराहना करने के लिए धन्यवाद दिया था। गहलोत ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर लिखा है कि ‘यह अच्छी बात है कि वसुंधरा जी ने हमें धन्यवाद दिया, लेकिन अच्छा होता कि यदि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने रिफाइनरी के लिए हमारी जैसी ही भावना दिखाई होती। जैसा कि हम ‘टक्नो हब’ की सराहना कर रहे हैं उन्हें भी रिफाइनरी के लिये बड़ा दिल दिखाना चाहिए था। गहलोत ने कहा वसुंधरा राजे जी जो तर्क अब रिफाइनरी के लिये दे रही हैं वो पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने जनता को गुमराह करके चार साल व्यर्थ किये।

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गहलोत ने कहा कि उन्होंने यदि उसका काम नहीं रोका होता तो राजस्थान को अब तक रिफाइनरी का तोहफा मिल गया होता। ‘हमारा प्रयास पिछली सरकार द्वारा शुरू किए गए सभी अच्छी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का है। हम ऐसी किसी योजना को नहीं रोक रहे जो राजस्थान की जनता के हित में है। जबकि एक दिन पहले ही वसुंधरा राजे ने ट्वीट किया था कि बाड़मेर रिफाइनरी का 2013 में कांग्रेस ने पत्थर तो लगा दिया, लेकिन उसके अलावा कागजी कार्यवाही तक करना आवश्यक नहीं समझा। हमारी भाजपा सरकार ने तो 3 साल में नया एमओयू कर काम भी शुरू कर दिया था। क्यों कांग्रेस को आचार संहिता से सिर्फ 11 दिन पहले ही बाड़मेर रिफाइनरी की याद आयी?
गौरतलब है कि विपक्ष में रहते हुए अशोक गहलोत रिफाइनरी के मामले को बार-बार उठाते रहे। कहते रहे कि रिफाइनरी के काम को रिव्यू के नाम पर रोकना गलत है, जबकि सरकार में रहते हुए वसुंधरा राजे की ओर से तर्क दिया जा रहा था कि रिफाइनरी लगाने के नाम पर कांग्रेस की ओर से केवल पत्थर लगाने का काम किया गया। 

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