रविदास मंदिर के लिए 4 एकड़ जमीन दे DDA, बदले में हम देंगे 100 एकड़: केजरीवाल
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रविदास मंदिर के लिए 4 एकड़ जमीन दे DDA, बदले में हम देंगे 100 एकड़: केजरीवाल

By News18 calender  23-Aug-2019

रविदास मंदिर के लिए 4 एकड़ जमीन दे DDA, बदले में हम देंगे 100 एकड़: केजरीवाल

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने तुगलकाबाद इलाके में रविदास मंदिर (Ravidas Temple) तोड़े जाने पर दिल्ली विधानसभा में कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जो समाज संत का मान न करें, वह किसी काम का नहीं है. सीएम केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली डेवलेपमेंट अथॉरिटी (DDA) हमें 4 एकड़ जमीन दे, तो हम उसे बदले में 100 एकड़ जमीन देंगे.

केजरीवाल के भाषण के दौरान सदन में हंगामा मच गया. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक विजेंद्र गुप्ता और ओपी शर्मा को सदन से बाहर भेज दिया.

क्या उसी जगह पर बनाया जाएगा पूरे देश का जंगल?
केजरीवाल ने कहा कि 12 से 15 करोड़ लोग 5 एकड़ जमीन मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि मंदिर के लिए फौरन जमीन दी जानी चाहिए. केजरीवाल ने सवाल किया कि क्या पूरे देश का जंगल उसी जगह पर बनाया जाएगा? जानकारी के लिए आपको बता दें कि इससे पहले दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने हंगामा किया था. AAP के विधायकों ने बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता के 'उत्पात' शब्द कहने पर हंगामा किया. आपत्ति जताने के बाद स्पीकर ने इस शब्द को रिकॉर्ड से हटाने का आदेश जारी कर दिया. आप के विधायकों ने सदन में, 'विजेंद्र गुप्ता माफी मांगों' के नारे लगाए.

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प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा

दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में रविदास मंदिर था. इस मंदिर को तोड़े जाने से नाराज दलित समाज के लोग रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन करने के बाद जब तुगलकाबाद पहुंचे तो वहां पत्थरबाजी शुरू हो गई. पत्थरबाजी के जवाब में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भी कई राउंड फायरिंग की. इसके बाद तुगलकाबाद में जबरदस्त हिंसा भड़क उठी. बुधवार रात हुई हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए जबकि दर्जनों गाड़ियों में तोड़-फोड़ की गई. हिंसा के बाद भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद समेत अब तक 91 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

ये है विवाद
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने 10 अगस्त 2019 को इस मंदिर को गिरा दिया था. लंबे समय से रविदास मंदिर बनाम डीडीए नाम से मुकदमा चल रहा था और कोर्ट के फैसले में डीडीए को जीत हासिल हुई थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मंदिर को तोड़ा गया, लेकिन इसकी प्रतिक्रिया में दलित समाज में खासी नाराजगी देखने को मिली. पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई जगह दलित समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किए.
 

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