डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस इंजेक्शन को लेने से मना किया था, उसी ने ली थी उनकी जान
Latest News
bookmarkBOOKMARK

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस इंजेक्शन को लेने से मना किया था, उसी ने ली थी उनकी जान

By Tv9bharatvarsh calender  14-Aug-2019

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस इंजेक्शन को लेने से मना किया था, उसी ने ली थी उनकी जान

‘एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे’…ये नारा था जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का. मुखर्जी जम्मू कश्मीर आंदोलन में पहली जब्त़ में खड़े होने वाले नेता थे. मुखर्जी ने सबसे पहले धारा 370 के खिलाफ आवाज बुलंद की वो थे जनसंघ के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी. मुखर्जी की मौत कश्मीर में हुई और 66 साल बाद भी मौत की वजह रहस्य के पर्दे में है. tv9 भारतवर्ष ने उस सच्चाई को जानने के लिए सीधे कश्मीर से इन्वेस्टिगेशन की है.
प्वाइंटर में समझिए पूरा घटनाक्रम

1- श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ
2- श्यामा प्रसाद मुखर्जी 33 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बनें
3- डॉ मुखर्जी 1939 से राजनीति में उतरे, गांधी जी और कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का विरोध किया
4- 1947 को प्रथम कैबिनेट के वित्त मंत्री बनें
5- सरकार में रहे लेकिन प. नेहरू से विवाद होता रहा
6- नेहरू लियाकत पैक्ट के विरोध में 6 अप्रैल 1950 को त्यागपत्र
7- 21 अक्टूबर को 1951 में जनसंघ की स्थापना
8- 1951-52 में डॉ मुखर्जी समेत तीन सांसद चुने गए
9- एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान का विरोध किया
10- 1952 में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म करने का संकल्प लिया
11- 8 मई 1953 को मुखर्जी दिल्ली से कश्मीर के लिए रवाना
12- 10 मई 1953 को मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया
13- श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सेफ हाउस श्रीनगर में नजरबंद किया गया
14- 22 जून 1953 को तबियत खराब हुई
15- मुखर्जी का इलाज डॉ अली मोहम्मद ने किया
16- अली मोहम्मद ने मुखर्जी को स्ट्रेप्टोमाइसिन का इंजेक्शन दिया
17- मुखर्जी ने इस इंजेक्शन को लेने से मना किया था
18- कुछ घंटों बाद ही उनकी मौत हो गई
19- 23 जून की सुबह 3.40 मिनट में कहा गया कि उनकी मौत हो गई
20- प. नेहरू ने खारिज की मौत की जांच की मांग
पिछले 66 साल से इस सवाल का जवाब अंधेरे में गुम है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर के उस 10 बाई 11 फीट के कमरे में क्या हुआ था जिसमें उन्हें नजरबंद किया गया था. सवाल और भी कई हैं. 6 दशक बीत गए…कई सरकारें आई और चली गईं..मगर राष्ट्रवादी शख्सियत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत मिस्ट्री से जुड़े सवाल आज भी जवाबों के इंतजार में घूम रहे हैं.
8 मई 1953 
सुबह 6:30 बजे दिल्ली रेलवे स्टेशन से पैसेंजर ट्रेन में अपने समर्थकों के साथ सवार होकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पंजाब के रास्ते जम्मू के लिए निकले. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी अनुच्छेद 370 के उस प्रावधान के सख्त खिलाफ थे, जिसके तहत भारत सरकार से बिना परमिट लिए कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता. इसी के खिलाफ उन्होंने ऐलान किया कि वो बिना परमिट कश्मीर जाएंगे और 8 मई 1953 को कश्मीर के लिए रवाना हो गए.
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ ट्रेन में बलराज मधोक और अटल बिहारी वाजपेयी के आलावा कुछ पत्रकार भी थे. रास्तें में हर जगह डॉ. मुखर्जी की एक झलक पाने के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ता था. डॉ. मुखर्जी ने जालंधर के बाद बलराज मधोक को वापस भेज दिया और अमृतसर के लिए ट्रेन पकड़ ली.
ये वो दौर था जब भारत के अभिन्न अंग कहे जाने वाले कश्मीर में घुसने के लिए परमिट की जरूरत पड़ती थी, लेकिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पास परमिट नहीं था. हैरानी की बात ये थी कि सरकार न तो उन्हें रोक रही थी और न ही गिरफ्तार कर रही थी. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फॉउंडेशन का आरोप है कि यही से असली साजिश शुरु हुई.
10 मई 1953 को जैसे ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू पहुंचे. उन्हें पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत इस आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया कि उनके यहां आने से शांति में खलल पड़ सकता है. गिरफ्तारी के बाद मुखर्जी को श्रीनगर ले जाया गया..लेकिन जेल की जगह उन्हें एक हवेली में नज़रबंद कर दिया गया.
टीवी9 भारतवर्ष की टीम उस घर की तलाश में निकली जहां 66 साल पहले श्यामा प्रसाद मुखर्जी हाउस अरेस्ट थे. थोड़ी सी कोशिश के बाद डल झील के करीब टीम को वो सेफ हाउस दिखा जिसे लोग किसी खान साहब का बताते हैं. यहां के बाशिंदों ने पूछते ही बता दिया कि अनुच्छेद 370 और परमिट राज का विरोध करने वाले डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यहीं नज़रबंद थे.
इसी सेफ हाउस में नज़रबंद श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तबीयत अचानक 22 जून को बिगड़ गई. उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. हॉस्पिटल में डॉक्टर अली मोहम्मद ने जांच की और पिर उन्हें एक इंजेक्शन दिया, जिसके कुछ घंटों बाद उनकी मौत हो गई. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के डायरेक्टर कहते हैं कि वो इंजेक्शन साजिश के तहत लगाया गया था, जबकि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने खुद डॉक्टर अली मोहम्मद को बताया था कि स्ट्रेप्टोमाइसिन दवा उन्हें सूट नहीं करती, लेकिन उनकी बातों को दरकिनार करते हुए इंजेक्शन दिया गया.

MOLITICS SURVEY

अयोध्या में विवादित जगह पर क्या बनना चाहिए ??

TOTAL RESPONSES : 15

Raise Your Voice
Raise Your Voice 

Suffering From Problem In Your Area ? Now Its Time To Raise Your Voice And Make Everyone Know