“मैं आया नहीं हूं, आप मुझे लेकर आए हैं”, ‘मन की बात’ में बोले PM मोदी
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“मैं आया नहीं हूं, आप मुझे लेकर आए हैं”, ‘मन की बात’ में बोले PM मोदी

By Tv9bharatvarsh calender  30-Jun-2019

“मैं आया नहीं हूं, आप मुझे लेकर आए हैं”, ‘मन की बात’ में बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी रविवार, 30 जून को ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित किया. पीएम मोदी ने करीब चार महीनों के बाद इस रेडियो कार्यक्रम से अपनी बात रखी. साथ ही दूसरी बार सरकार बनने के बाद यह पहला मौका था जब पीएम ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने ट्वीट करके इसकी जानकारी पहले ही दे दी थी.
पीएम मोदी ने कहा, “योग के क्षेत्र में योगदान के लिए Prime Minister’s Awards की घोषणा, अपने आप में मेरे लिए एक बड़े संतोष की बात थी. यह पुरस्कार दुनिया भर के कई संगठनों को दिया गया है.”
पीएम मोदी ने कहा कि शायद ही कोई जगह ऐसी होगी, जहां इंसान हो और योग के साथ जुड़ा हुआ न हो, इतना बड़ा, योग ने रूप ले लिया है.
उन्होंने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियों, मुझे और एक बात के लिए भी आपका और दुनिया के लोगों का आभार व्यक्त करना है. 21 जून को फिर से एक बार योग दिवस में उमंग के साथ, एक-एक परिवार के तीन-तीन चार-चार पीढ़ियां, एक साथ आ करके योग दिवस को मनाया.
पीएम मोदी ने कहा, “देशवासियों से मेरा दूसरा अनुरोध है. हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं. मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हूं.”
उन्होंने कहा कि हमारे देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं. मैं आप सभी से, जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को शेयर करने का आग्रह करता हूं.
पीएम ने कहा, “जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों का, स्वयं सेवी संस्थाओं का, और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर किसी का, उनकी जो जानकारी हो, उसे आप #JanShakti4JalShakti के साथ शेयर करें ताकि उनका एक डाटाबेस बनाया जा सके.”
पीएम मोदी ने कहा कि जो भी पोरबंदर के कीर्ति मंदिर जायें वो उस पानी के टांके को जरूर देखें. 200 साल पुराने उस टांके में आज भी पानी है और बरसात के पानी को रोकने की व्यवस्था है, ऐसे कई प्रकार के प्रयोग हर जगह पर होंगे. उन्होंने कहा कि जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है. इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेजी से फैसले लिए जा सकेंगे.
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पीएम मोदी ने कहा कि मेरा पहला अनुरोध है- जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया. आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें.
पीएम ने कहा कि 2019 का लोकसभा का चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था. आप कल्पना कर सकते हैं कि इस प्रकार के चुनाव संपन्न कराने में कितने बड़े स्तर पर संसाधनों की और मानवशक्ति की आवश्यकता हुई होगी. लाखों कर्मियों की दिन-रात की मेहनत से चुनाव संपन्न हो सका. सैन्य कर्मियों ने भी परिश्रम की पराकाष्ठा की.
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर स्थित मतदान केंद्र भी भारत में ही है. यह मतदान केंद्र हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्फिति क्षेत्र में 15000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. मैं चुनाव आयोग को, और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को, बहुत-बहुत बधाई देता हूं और भारत के जागरूक मतदाताओं को नमन करता हूं.
उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के एक रिमोट इलाके में, महज एक महिला मतदाता के लिए पोलिंग स्टेशन बनाया गया. आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को वहां पहुंचने के लिए दो-दो दिन तक यात्रा करनी पड़ी. यही तो लोकतंत्र का सच्चा सम्मान है.
उन्होंने कहा कि भारत गर्व के साथ कह सकता है कि हमारे लिए, कानून नियमों से परे लोकतंत्र हमारे संस्कार हैं, लोकतंत्र हमारी संस्कृति है, लोकतंत्र हमारी विरासत है. और आपातकाल में हमने अनुभव किया था और इसीलिए देश, अपने लिए नहीं, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आहुत कर चुका था.
पीएम ने कहा, “जब देश में आपातकाल लगाया गया तब उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रहा था, राजनेताओं तक सीमित नहीं रहा था, जेल के सलाखों तक, आन्दोलन सिमट नहीं गया था. जन-जन के दिल में एक आक्रोश था.”
पीएम मोदी ने कहा कि मैं आया नहीं हूं, आप मुझे लेकर आए हैं. उन्होंने कहा, “एक लंबे अंतराल के बाद आपके बीच मन की बात, जन-जन की बात, जन-मन की बात इसका हम सिलसिला जारी कर रहे हैं. चुनाव की आपाधापी में व्यस्तता तो ज्यादा थी लेकिन मन की बात का मजा ही गायब था, एक कमी महसूस कर रहा था. हम 130 करोड़ देशवासियों के स्वजन के रूप में बातें करते थे.” पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ देश और समाज के लिए आईने की तरह है. ये हमें बताता है कि देशवासियों के भीतर अंदरूनी मजबूती, ताकत और टैलेंट की कोई कमी नहीं है.

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