दो पुलिस कांस्टेबलों की जाबांजी और सूझबूझ से बच गई सैंकड़ों जानें, नंगे हाथों से तार खींचकर काटी बिजली
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दो पुलिस कांस्टेबलों की जाबांजी और सूझबूझ से बच गई सैंकड़ों जानें, नंगे हाथों से तार खींचकर काटी बिजली

By Bhaskar calender  24-Jun-2019

दो पुलिस कांस्टेबलों की जाबांजी और सूझबूझ से बच गई सैंकड़ों जानें, नंगे हाथों से तार खींचकर काटी बिजली

जिले में बालोतरा तहसील के जसोल धाम में चल रही रामकथा के दौरान पांडाल गिरने पर करंट दौड़ने से हादसे में मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता था। वहां लोहे के बड़े एंगल के नीचे दबे लोगों की और भी जानें जा सकती थी। लेकिन वहां मौजूद दो पुलिस कांस्टेबलों के साहस और सूझबूझ की वजह से यह सब टल गया।
दैनिक भास्कर मोबाइल एप अपनी एक्सक्लूसिव खबर में पाठकों को बता रहा है कि कैसे राजस्थान पुलिस के दो कांस्टेबल गोमाराम और दौलाराम ने तेज अंधड़े और बारिश के बीच भीगी हुई वर्दी में अपने गीले नंगे हाथों से एक युवक के साथ मिलकर किस तरह ऑटो स्टार्ट जनरेटर के तारों को खींचकर पांडाल में बेसुध श्रद्धालुओं के शरीर में दौड़ रहे करंट को रोका और सैंकड़ों लोगों की जान बचा ली।
बहादुरी की कहानी सिपाहियों की जुबानी: कांस्टेबल गोमाराम व दौलाराम ने बताया कि वे दोनों बाड़मेर के बालोतरा थाने की जसोल पुलिस चौकी पर पदस्थापित है। 22 जून से जसोल धाम स्थित एक सरकारी हाई स्कूल के ग्राउंड में शुरु हुई रामकथा में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी। वे 23 जून को दोपहर करीब 3:15 बजे पांडाल में सबसे पीछे लगी कुर्सियों पर बैठे थे। इसी बीच तेज आंधी के साथ बारिश शुरु हुई।
जो कि धीरे-धीरे तेज होती गई। करीब पंद्रह मिनट बाद ही अचानक आंधी तेज हो गई और भीषण प्रवाह से अंधड़ पांडाल में घुसा। इससे लोहे के एंगल से बना पांडाल हवा में करीब 10 से 15 फीट ऊंचा उठ गया और पास ही ग्राम पंचायत की बिल्डिंग से टकराया। गोमाराम ने बताया कि यह देखकर वह अपने साथी पुलिसकर्मियों के साथ बाहर आ गया। इसी बीच पांडाल ढहकर गिर गया।
तब करीब 500-700 लोग पांडाल में मौजूद थे। इनमें से पीछे बैठे 20-25 लोग तुरंत निकल कर बाहर आ गए। मिट्टी का मैदान होने से वहां चारों तरफ पानी भर गया। इस बीच बिजली कट गई। लेकिन वहां लगे दो ऑटो स्टार्ट जनरेटर्स में एक जनरेटर चालू हो गया। इससे पांडाल परिसर में करंट फैल गया।
कांस्टेबल दौलाराम ने बताया कि जब उन्होंने पांडाल में गिरे कुछ लोगों को उठाने की कोशिश की। तब उन्हें भी करंट के झटके लगे। इससे वे उन्हें उठा नहीं सके। वहां चीख पुकार मची थी। सैंकड़ों लोग आंखों के सामने तड़प रहे थे। ऐसे में मैंने तत्काल साथी पुलिसकर्मी गोमाराम से जनरेटर की बिजली काटने को कहा। ताकि करंट रुक जाए।
तब गोमाराम ने कहा कि उसे भी जनरेटर बंद करना नहीं आता। कांस्टेबल गोमाराम ने बताया कि किसी भी तरह से लोगों को करंट से बचाना जरुरी था। ऐसे में कांस्टेबल गोमाराम व दौलाराम ने जान हथेली पर रखकर बहादुरी दिखाते हुए वहां मदद में जुटे स्थानीय युवक अक्षय को साथ लिया। तीनों ने हिम्मत दिखाते हुए ऑटो स्टार्ट जनरेटर के तारों को खींचा। तब तार भी गीले थे।

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