हालांकि, सपा के संग्राम सिंह यादव ने पशुधन मंत्री के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारियों के भ्रम में आकर मंत्री गलत जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मंत्री खुद जमीनी हकीकत का निरीक्षण करें, जिससे गो-आश्रय स्थलों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि इन आश्रय स्थलों पर पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है और उनके लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों की स्थिति पर चिंता जताई और सुझाव दिया कि सरकार को पीड़ितों के परिजनों को आर्थिक सहायता देनी चाहिए।
‘फसल को नुकसान नहीं हो रहा’— मंत्री का दावा, विपक्ष ने किया विरोध
सपा सदस्य अनिल प्रधान ने छुट्टा पशुओं द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने का मुद्दा उठाया, जिसके जवाब में मंत्री ने कहा कि ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार गोवंश संरक्षण पर रोजाना 7.50 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, क्योंकि यह सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्या ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों की तरह आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को वेतन और अन्य सुविधाएं देने पर सरकार विचार नहीं कर रही है। यह बयान उन्होंने सपा सदस्य बृजेश कठेरिया के सवाल के जवाब में दिया।
उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बीमा योजनाओं का लाभ दिया गया है। वहीं, सपा के त्रिभुवन दत्त द्वारा मानदेय बढ़ाने के सवाल पर मंत्री ने शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि यह सेवा मानदेय आधारित है और इसमें बदलाव की कोई योजना नहीं है।
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने सदन में जानकारी दी कि मिठाइयों और खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए सतत अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बीते एक साल में की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश करते हुए बताया कि 4344 नमूने लिए गए, जिनमें से 1201 नमूने अधोमानक पाए गए।
उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले 150 मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है और मिलावटखोरी के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने करनैलगंज के पूर्व विधायक कुंवरि बृज सिंह के निधन की जानकारी सदन को दी। इस दौरान सदस्यों ने बताया कि अमरोहा की हसनपुर सीट से पूर्व विधायक रफाकत हुसैन और रायबरेली की डलमऊ सीट के पूर्व विधायक गजाधर सिंह के निधन की सूचना सदन में नहीं दी गई।
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