राजनीति छोड़ने का ऐलान
67 वर्षीय विजयसाई रेड्डी ने कहा, "मैं राजनीति छोड़ रहा हूं और 25 जनवरी को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दूंगा। मैं किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं होऊंगा। यह फैसला मेरा व्यक्तिगत है, मुझ पर किसी का दबाव नहीं था। मैं किसी पद, लाभ या धन की आकांक्षा नहीं रखता।" उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन यह उनके जीवन के अगले अध्याय को समर्पित करने का सही समय है।
रेड्डी ने अपने राज्यसभा कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का समर्थन मिलने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "मुझे 9 वर्षों तक प्रोत्साहित करने, साहस देने और तेलुगु राज्यों में पहचान दिलाने के लिए मैं पीएम मोदी और अमित शाह का विशेष धन्यवाद करता हूं।"
वाईएसआर परिवार के प्रति आभार
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो जगन मोहन रेड्डी के करीबी माने जाने वाले विजयसाई रेड्डी ने पार्टी और वाईएसआर परिवार के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "वाईएसआर परिवार ने चार दशकों और तीन पीढ़ियों तक मुझ पर जो भरोसा दिखाया, उसके लिए मैं उनका कर्जदार हूं। मुझे दो बार राज्यसभा सदस्य बनने का अवसर देने के लिए मैं जगन मोहन रेड्डी गारू का आभारी हूं। मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।"
विजयसाई रेड्डी आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण हस्ती रहे हैं। उन्होंने 2016 में राज्यसभा सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। वे वाईएसआरसीपी के राष्ट्रीय महासचिव और परिवहन, पर्यटन, और संस्कृति पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
रेड्डी ने अपने राजनीतिक करियर में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के साथ वैचारिक मतभेदों को स्वीकार किया, लेकिन एन. चंद्रबाबू नायडू और उनके परिवार के साथ व्यक्तिगत संबंध सौहार्दपूर्ण बनाए रखा। उन्होंने जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का भी उल्लेख किया।
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