भूकंप का केंद्र म्यांमार के मांडले शहर से लगभग 17.2 किलोमीटर दूर था, और इसका असर म्यांमार के अलावा थाईलैंड, बांगलादेश, भारत, लाओस, और चीन के कुछ हिस्सों में भी महसूस किया गया। इन देशों में भी भूकंप के झटकों से लोगों में घबराहट फैल गई।
चीन के युन्नान प्रांत में भी इस भूकंप के कारण मजबूत झटके महसूस किए गए, हालांकि यहां से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई। भारत के पश्चिम बंगाल और मणिपुर राज्य में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए, जबकि बांगलादेश में 7.3 तीव्रता के भूकंप के बाद हल्के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप और उसके आफ्टरशॉक्स ने क्षेत्र के कई देशों में व्यापक घबराहट का माहौल बना दिया है।
म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र से लगभग 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में आया यह भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.7 तीव्रता का था, और इसका केंद्र 22.01 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 95.92 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था, जो सतह से 10.0 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके सिर्फ म्यांमार और थाईलैंड तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि इसके असर से बांगलादेश, भारत, लाओस और चीन के कुछ हिस्सों में भी बुरी तरह से धरती हिली।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार और थाईलैंड में इस भीषण भूकंप के कारण उत्पन्न संकट पर चिंता व्यक्त की और कहा कि भारत इस कठिन समय में दोनों देशों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री भेजने की तैयारी पूरी कर ली है और वह प्रभावितों की मदद के लिए तत्पर है। भारत की ओर से यह समर्थन दोनों देशों के लिए संकट के इस समय में एक बड़ी मदद साबित हो सकता है।
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