CPI का तीखा हमला: ‘जस्टिस वर्मा को जज पद से हटाया जाए’
CPI सांसद पी. संदोष कुमार ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "असल में, उन्हें जज के पद से हटा दिया जाना चाहिए। उनके खिलाफ जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।" उन्होंने आगे कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील भी इस फैसले का पुरजोर विरोध कर रहे हैं और इस स्थान को "डंपिंग ग्राउंड" में बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। CPI नेता ने केंद्र सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया है कि जब जस्टिस वर्मा कार्यभार संभालें, तो उन्हें कोई भी न्यायिक कार्य न सौंपा जाए।
जस्टिस वर्मा के तबादले को लेकर वकीलों में भी जबरदस्त आक्रोश है। इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने इसे भारत की न्यायपालिका के लिए "सबसे काला दिन" करार दिया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वकील जस्टिस वर्मा के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करेंगे। इस विवाद के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट के वकील मंगलवार से हड़ताल पर हैं।
शुक्रवार को PTI से बातचीत में अनिल तिवारी ने कहा, "हमारे विरोध का तरीका बदल सकता है, लेकिन यह संघर्ष जारी रहेगा।" उन्होंने यह भी बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ चर्चा के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर फैसला किया जाएगा।
अनिल तिवारी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "यह आम जनता के साथ अन्याय है। इलाहाबाद हाई कोर्ट को कूड़ा घर में तब्दील किया जा रहा है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
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