छत्तीसगढ़ में दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी ने केरल की राजनीति में जबरदस्त उबाल ला दिया है। इन ननों पर कथित तौर पर धर्मांतरण और मानव तस्करी में संलिप्त होने के आरोप हैं। केरल के वायनाड से सांसद और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को संसद परिसर में प्रदर्शन कर दोनों ननों की रिहाई की मांग की।
यह मामला तब गरमाया जब राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन से सिस्टर प्रीति मैरी, सिस्टर वंदना फ्रांसिस और एक अन्य व्यक्ति सुकमन मंडावी को गिरफ्तार किया। आरोप है कि ये तीनों महिलाएं नारायणपुर जिले से तीन युवतियों को जबरन धर्म परिवर्तन के इरादे से ले जा रहे थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन तीनों महिलाओं के परिजनों ने किसी भी तरह की तस्करी या धर्मांतरण से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी मर्जी और माता-पिता की सहमति से नौकरी के लिए आगरा के कॉन्वेंट में जा रही थीं।
Assisi Sisters of Mary Immaculate की मध्य प्रदेश इकाई की महासचिव नित्या फ्रांसिस ने बताया कि “प्रीति और वंदना उन्हें नौकरी देने के लिए स्टेशन पर लेने गई थीं। सब कुछ पारदर्शी था। अब इसे गलत रंग दिया जा रहा है।”
राजनीतिक हलचल तेज, प्रियंका गांधी ने संभाला मोर्चा
इस घटना ने केरल में सियासी भूचाल ला दिया है। प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने संसद परिसर में धरना दिया और इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया।
केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने भी इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, राज्य में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पुतला दहन किया।
गौरतलब है कि केरल में आगामी एक वर्ष में विधानसभा चुनाव होने हैं और ईसाई समुदाय वहां राजनीतिक रूप से निर्णायक भूमिका निभाता है। इसीलिए कांग्रेस और एलडीएफ दोनों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है।
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गिरफ्तार ननों के वकील तामसकर टंडन ने आरोप लगाया कि GRP ने बिना किसी प्राथमिक जांच के केवल संदेह के आधार पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी कर ली।
ईसाई संगठनों ने भी दावा किया है कि दक्षिणपंथी संगठनों ने आरोपियों को निशाना बनाया और धार्मिक घृणा को हवा दी जा रही है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –
“भाजपा-शासित राज्यों में अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं। वोट बैंक के लिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।”





