टैरिफ पर संभावित निर्णय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल और गैस आयात करने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं। इस संदर्भ में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जानकारी दी कि ट्रंप इस निर्णय पर अगले 10 दिनों में फैसला कर सकते हैं। इस टैरिफ में भारत और चीन सहित अन्य देशों का भी नाम शामिल है।
ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए गोर ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को उन देशों पर दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार देता है, जो रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदते हैं या मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। हालांकि, गोर ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी एक देश को निशाना बनाना नहीं है।
निर्णय में देरी और आशंकाएं
गोर ने कहा, "मुझे लगता है कि लगभग 10 दिन में इस पर निर्णय लिया जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ने अभी तक किसी भी देश पर इस कानून के तहत प्रतिबंध नहीं लगाए हैं। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को पारित होने के 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का समय मिलता है।
गोर ने कहा कि अमेरिकी सीनेट में इस कानून को मजबूत समर्थन मिला है, जिसमें 100 में से 86 सीनेटरों ने इसके पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि युद्ध को समाप्त करने की कोशिश करना है। ट्रंप के निर्णय की उम्मीद अगले कुछ दिनों में की जा रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर प्रगति
सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति पर भी उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि बातचीत की जटिलताओं के बावजूद दोनों देशों के बीच काफी प्रगति हुई है और अब छोटी-छोटी समस्याओं को हल करना है।
गोर ने बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत पिछले ढाई साल से चल रही है और यह अन्य व्यापारिक समझौतों की तुलना में असामान्य रूप से तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रशासन को पुराने व्यापार समझौते के कुछ हिस्सों पर फिर से विचार करना पड़ा, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित किया।
उच्च स्तरीय सहयोग की बात
एक अन्य कार्यक्रम में, गोर ने कहा था कि भारत और अमेरिका रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, और स्वास्थ्य देखभाल जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। उन्होंने अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 साल पूरे होने के अवसर पर दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी पर जोर दिया।
गोर ने हाल ही में हुए सैन्य अभ्यासों, रक्षा सहयोग, और अमेरिकी व भारतीय कंपनियों के निवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध बहुत मजबूत हैं। उन्होंने कहा, "आप किसी भी क्षेत्र को चुनें, हम उसमें मिलकर काम कर रहे हैं।"





