सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर गर्भवती पत्रकार को धक्का देने के आरोपों की जांच करने का आदेश दिया है। यह घटना सुप्रीम कोर्ट परिसर में होने का दावा किया गया है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील और भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए कहा कि इस घटना के परिणामस्वरूप महिला पत्रकार को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
भाटिया ने तर्क दिया कि पत्रकारों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी मामले में रिपोर्टिंग कर रहे हों। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला पुलिस अधिकारियों के साथ विरोध-प्रदर्शन के दौरान बदसलूकी की गई।
वकीलों के बीच तीखी बहस
इस दौरान इंदिरा जयसिंह ने भाटिया के आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें अदालत में राजनीति करने का दोषी ठहराया। वरिष्ठ वकील जयसिंह ने कहा कि भाटिया इस मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं और इसे केवल एक जवाबी हमले के रूप में देखा जाना चाहिए।
CJI सूर्यकांत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अदालत इस याचिका में उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और नोटिस जारी करेगी। भाटिया ने अदालती कार्यवाही के दौरान आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने तीन महीने की गर्भवती महिला को धक्का दिया था।
सुनवाई का माहौल
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इंदिरा जयसिंह से कहा कि 'अदालत में चिल्लाना बंद करें।' उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी अभिव्यक्ति के अधिकारों की रक्षा चाहते हैं, लेकिन दूसरों को, यहां तक कि अदालत को, यह अधिकार नहीं देना चाहते।
इंदिरा जयसिंह ने राहुल गांधी पर लगाए गए आरोपों को मीडिया के लिए किया गया ड्रामा बताते हुए इसे नौटंकी करार दिया। उनके अनुसार, यह सब एक नाटक है जो सार्वजनिक ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है।





