प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "एक ओर हम अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न मुद्दों पर त्वरित प्रतिबंध लगा देते हैं, वहीं दूसरी ओर, आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को अनदेखा करते हैं। यह दोहरी नीति अब समाप्त होनी चाहिए।"
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदुओं को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने जी-7 नेताओं को भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाइयों की जानकारी दी।
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए इस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारत ने एक सटीक और प्रभावी सैन्य अभियान के तहत पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी संगठनों के प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया। इस अभियान से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि वह अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर का उपयोग ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को प्रमुखता से उजागर करने के लिए भी किया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की आवाज को उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का उपयोग आमतौर पर उन देशों के लिए किया जाता है, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से कम विकसित हैं। उन्होंने जी-7 नेताओं से इन देशों की समस्याओं पर ध्यान देने और उनके विकास के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।
शिखर सम्मेलन के इतर, प्रधानमंत्री मोदी ने कई द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी एल्बानीज के साथ मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापारिक सहयोग, निवेश के अवसरों, और वैश्विक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के तरीकों पर गहन चर्चा हुई।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा, हरित प्रौद्योगिकी, और स्थायी विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने भारत की प्रमुख वैश्विक पहलों, जैसे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन, और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहलें ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और पर्यावरण संरक्षण में सहायक होंगी।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा की। उन्होंने ‘डीपफेक’ तकनीक पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एआई द्वारा निर्मित सामग्री की पहचान के लिए इसे स्पष्ट रूप से चिह्नित करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर सहमति बनाकर नियम और मानक स्थापित किए जाने चाहिए।
भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव को कम करने के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए। दोनों देशों ने नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति पर सहमति व्यक्त की, जिससे वीजा सेवाओं, वाणिज्यिक गतिविधियों, और अन्य सेवाओं को सामान्य बनाने में मदद मिलेगी।
Read This Also:- PM मोदी का साइप्रस से संदेश: संघर्ष से नहीं, संवाद से सुलझें विवाद





