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Mahakumbh 2025: ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटाया गया, किन्नर अखाड़े में विवाद

प्रयागराज महाकुंभ में किन्नर अखाड़े के अंदर एक बड़ा विवाद उठ खड़ा हुआ है। किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद |

Mahakumbh 2025: ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटाया गया, किन्नर अखाड़े में विवाद
फोटो: Mahakumbh 2025, Mamta Kulkarni, Kinnar Akhara
प्रयागराज महाकुंभ में किन्नर अखाड़े के भीतर एक बड़ी और गंभीर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसे लेकर पूरे किन्नर समाज में हलचल मच गई है। किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने अभिनेता ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटा दिया है। यह कदम ममता द्वारा सिर न मुंडाने के कारण उठाया गया है, क्योंकि किन्नर समुदाय में यह एक प्राचीन और महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है। किन्नर समाज में सिर मुंडवाना एक संकेत है कि व्यक्ति ने समाज की सेवा में समर्पण कर दिया है, और यह एक आधिकारिक स्वीकृति का प्रतीक भी है। 

 ऋषि अजय दास ने खुद को अखाड़े का संस्थापक बताते हुए इस फैसले की जानकारी दी और साथ ही कहा कि वह इस पर विस्तृत प्रेस वार्ता करेंगे, ताकि यह मामला और अधिक स्पष्ट हो सके। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को भी पद से हटा दिया है। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी इस निर्णय से बेहद आहत हैं और खुद को किन्नर अखाड़े का संस्थापक बताते हुए इस फैसले का विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि अजय दास को 2017 में अखाड़े से निकाल दिया गया था, और अब वह किसी प्रकार से इस पद के अधिकारी नहीं हैं। यह विवाद ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद और भी बढ़ गया, जब से यह चर्चा शुरू हुई कि एक फिल्मी अभिनेत्री को किन्नर समाज के इतने महत्वपूर्ण और सम्मानित पद पर नियुक्त किया गया है। 

किन्नर समाज में इस निर्णय को लेकर कई मतभेद उत्पन्न हो गए थे। कुछ लोग इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे थे, जबकि कुछ ने इसे किन्नर समुदाय की परंपराओं और सिद्धांतों के खिलाफ माना। अब यह मुद्दा किन्नर अखाड़े के अंदर एक आंतरिक शक्ति संघर्ष का रूप ले चुका है, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं। इस मामले ने सिर्फ किन्नर समाज को ही नहीं, बल्कि पूरे महाकुंभ को भी प्रभावित किया है। महाकुंभ के दौरान इस प्रकार का विवाद सामने आने से किन्नर समुदाय की प्रतिष्ठा पर सवाल उठने लगे हैं। 

इसके अलावा, अखाड़े के अन्य सदस्य भी इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं, जो मामले को और भी जटिल बना रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है और किन्नर समाज की आंतरिक व्यवस्था पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

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