"औरंगजेब की निशानियों को मिटा देंगे" - संगीत सोम
सभा को संबोधित करते हुए संगीत सोम ने कहा, "जब औरंगजेब ने काशी और मथुरा के मंदिरों को तोड़ा था, तब क्या उसने किसी कोर्ट का सहारा लिया था? क्या उसके खिलाफ कोई मुकदमा चला था? अगर तब ऐसा नहीं हुआ, तो अब हमसे क्यों कहा जाता है कि हर चीज कानूनी तरीके से हो?" उन्होंने दावा किया कि जिस तरह अयोध्या में बाबरी ढांचे को गिराकर भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी तरह काशी और मथुरा में भी मंदिर बनाए जाएंगे।
संगीत सोम ने लोगों से अपील की कि वे शपथ लें कि मथुरा और काशी में भव्य मंदिरों का निर्माण करेंगे। उन्होंने कहा, "बाबर की निशानी मिट चुकी है, अब समय आ गया है कि औरंगजेब की भी हर निशानी को समाप्त कर दिया जाए।" उन्होंने दोहराया कि मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट जाने की जरूरत नहीं होगी और जनता खुद इसे अंजाम देगी।
संगीत सोम के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कई विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों ने इसे भड़काऊ और सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाला करार दिया है।
हालांकि, भाजपा के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने अभी तक इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी इस बयान से दूरी बना सकती है, क्योंकि सरकार काशी और मथुरा से जुड़े मुद्दों को कानूनी प्रक्रिया के तहत हल करने की नीति पर चल रही है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब संगीत सोम विवादों में घिरे हैं। इससे पहले भी वे अपने उत्तेजक बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान भी उन पर सांप्रदायिक माहौल भड़काने के आरोप लगे थे। उनके ताजा बयान से एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि धार्मिक स्थलों को लेकर राजनीति कब तक जारी रहेगी और इसके क्या परिणाम होंगे?
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