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" संसद में बोले विदेश मंत्री- ‘अमेरिका से डिपोर्टेशन पर कोई नया फैसला नहीं, 2009 से हो रही ये कार्रवाई’"

उन्होंने बताया कि हर साल अवैध अप्रवासियों को उनके देशों में वापस भेजने का काम होता है, और अमेरिकी कानून के तहत इस कार्रवाई को किया गया। जयशंकर ने बताया कि यह |

" संसद में बोले विदेश मंत्री- ‘अमेरिका से डिपोर्टेशन पर कोई नया फैसला नहीं, 2009 से हो रही ये कार्रवाई’"
फोटो: America, Parliament,
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में अमेरिका से भारतीय नागरिकों के डिपोर्टेशन पर अपना बयान जारी करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य लीगल माइग्रेशन को बढ़ावा देना और अवैध माइग्रेशन को हतोत्साहित करना है। उन्होंने इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र की संधि का उल्लेख किया और बताया कि अवैध अप्रवासी जो अमेरिका में अमानवीय परिस्थितियों में फंसे हुए थे, उन्हें वापस भेजना अनिवार्य था। विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि डिपोर्टेशन कोई नया कदम नहीं है और यह प्रक्रिया 2009 से लगातार चल रही है। उन्होंने बताया कि हर साल अवैध अप्रवासियों को उनके देशों में वापस भेजने का काम होता है, और अमेरिकी कानून के तहत इस कार्रवाई को किया गया। जयशंकर ने बताया कि यह प्रक्रिया 2012 से लागू है और यह पहली बार नहीं है जब किसी को वापस भेजा गया है।

कांग्रेस ने दिया तिखा विरोध 

 
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के बाद तीखा विरोध जताते हुए कहा, "हाथों में हथकड़ी और पैरों में जंजीर, यह भारत मां के सीने को छलनी करने जैसा है। 40 घंटे की लंबी यात्रा, केवल एक टॉयलेट और महिलाओं के साथ अमानवीय तरीके से इन भारतीयों को वापस भेजा गया।" उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार को यह जानकारी है कि लगभग 7 लाख 25 हजार भारतीय नागरिक अमेरिका में हैं, जिनके खिलाफ ऐसी ही कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है। 

सुरजेवाला ने यह भी पूछा कि इनमें से कितने भारतीय नागरिकों को अमेरिका ने डिटेंशन सेंटर में बंद कर रखा है, और क्या उन्हें काउंसलर का एक्सेस दिया गया है। इसके अलावा, उन्होंने ट्रंप सरकार पर सौ करोड़ खर्च करने वाली भारतीय सरकार से यह सवाल भी पूछा, "क्या अब इस मुद्दे पर सरकार का क्या विचार है?" सुरजेवाला ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक छोटा देश कोलंबिया भी अपने नागरिकों के साथ बेइज्जती होने पर विरोध कर सकता है, तो भारत सरकार इस मामले में चुप क्यों है?

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