इसका नतीजा यह था कि वे अपनी सीट से हिल भी नहीं पा रहे थे। इस दयनीय स्थिति में रहने के बावजूद, उनकी सुरक्षा जांच के दौरान कोई भी सहानुभूति या मदद नहीं मिली, जिससे उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति और खराब हो गई। राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री जी, इस आदमी का दर्द सुनिए, भारतीय सम्मान और मानवता के पात्र हैं, हथकड़ी के नहीं।"
हरविंदर सिंह ने अमेरिका से भारत की यात्रा को 'नरक से भी बदतर' बताया और कहा कि उन्हें और अन्य भारतीयों को 40 घंटों तक सही तरीके से खाना नहीं मिल सका। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से हथकड़ी हटाने के लिए कई बार अनुरोध किया, लेकिन कोई भी सुनवाई नहीं हुई।
इस मामले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद के दोनों सदनों में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने विपक्षी नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार को इन 104 भारतीयों के वतन वापसी के बारे में पहले ही जानकारी थी। एस जयशंकर ने कहा, "हमने अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत की और निर्देश दिए कि रिटर्नी से एक-एक करके पूछताछ की जाए कि वे किस तरह से अमेरिका गए थे। अगर कोई नागरिक अवैध रूप से विदेश में रह रहा है, तो उसे वापस लाना सभी देशों का कर्तव्य है। हम अमेरिकी सरकार से बातचीत कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन लौटने वाले लोगों के साथ कोई दुर्व्यवहार न हो और उनके सम्मान की रक्षा की जाए।"
इसके अलावा, विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार इस मामले में सभी पहलुओं की जांच कर रही है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
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