वक्फ संपत्तियों का उपयोग सभी जरूरतमंदों के लिए हो
राज्यपाल खान ने कुरान की आयतों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि वक्फ संपत्तियों का लाभ केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हर जरूरतमंद – चाहे वह किसी भी धर्म का हो – उसे इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “वक्फ का मकसद गरीबों, बेसहारा और वंचित लोगों की मदद करना है। जब मैं उत्तर प्रदेश में मंत्री था, तब मुझे वक्फ विभाग का भी कार्यभार मिला था। उस दौरान मैंने देखा कि अधिकतर समय संपत्ति विवादों में ही बीतता था, न कि जनकल्याण में।”
उन्होंने कहा कि पटना जैसी जगहों पर जहां बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियाँ हैं, वहाँ न तो कोई वक्फ अस्पताल है, न ही कोई अनाथालय। ऐसे में सुधार की आवश्यकता और भी स्पष्ट हो जाती है।”
गौरतलब है कि वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लोकसभा और राज्यसभा – दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून का रूप ले लेगा।
राज्यसभा में इस विधेयक के पक्ष में 128 वोट पड़े, जबकि विरोध में 95 वोट। वहीं लोकसभा में विधेयक के समर्थन में 288 और विरोध में 232 वोट डाले गए। दोनों सदनों में इस पर लंबी बहस हुई, जिसमें पक्ष-विपक्ष की ओर से कई महत्वपूर्ण तर्क सामने आए।
वहीं केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे सुरक्षित देश है, खासकर अल्पसंख्यकों के लिए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि शिया, सुन्नी समेत सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का प्रयास है।
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार तो पारसी जैसे छोटे समुदायों के संरक्षण के लिए भी काम कर रही है। विपक्ष इसे मुस्लिम विरोधी बता रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी और जनकल्याणकारी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।”
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