Molitics Logo
होम दिल्ली की सत्ता संभालते ही BJP के सामने बड़ी चुनौतियां – यमुना, कूड़ा और फ्री सुविधाओं का गणित

दिल्ली की सत्ता संभालते ही BJP के सामने बड़ी चुनौतियां – यमुना, कूड़ा और फ्री सुविधाओं का गणित

पार्टी ने अपने घोषणापत्र में यमुना की सफाई, सड़क-पानी, कूड़े के पहाड़ों की समस्या और स्वच्छता जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया था। जनता से यह वादा किया |

दिल्ली की सत्ता संभालते ही BJP के सामने बड़ी चुनौतियां – यमुना, कूड़ा और फ्री सुविधाओं का गणित
फोटो: BJP, garbage, Yamuna
दिल्ली में ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने चुनावी वादों को पूरा करने की है, खासकर तब जब राज्य की वित्तीय स्थिति पहले से ही संतुलन की मांग कर रही है। बीजेपी ने यह चुनाव आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल के अधूरे वादों के खिलाफ लड़ा था। पार्टी ने अपने घोषणापत्र में यमुना की सफाई, सड़क-पानी, कूड़े के पहाड़ों की समस्या और स्वच्छता जैसे अहम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया था। जनता से यह वादा किया गया था कि बीजेपी उन योजनाओं को पूरा करेगी जो AAP सरकार अधूरी छोड़ गई थी। इतना ही नहीं, बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी से आगे बढ़ते हुए कुछ नई कल्याणकारी योजनाओं का भी ऐलान किया था। अब जब दिल्ली की जनता ने भगवा दल को 27 साल बाद सत्ता में वापसी का मौका दिया है, तो पार्टी के सामने इन वादों को जमीनी हकीकत में बदलने की बड़ी चुनौती है।

बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में कई ऐसी योजनाएं शामिल हैं, जिनके लिए बड़े बजट की आवश्यकता होगी। इनमें गरीब महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता (70 साल से ऊपर वालों के लिए 3,000 रुपये तक), गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये की आर्थिक मदद और गरीब परिवारों के बच्चों को किंडरगार्टन से पोस्ट ग्रेजुएशन तक मुफ्त शिक्षा देने का वादा किया गया है। हालांकि, दिल्ली सरकार की मौजूदा वित्तीय स्थिति को देखते हुए इन योजनाओं को लागू करना आसान नहीं होगा।

आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली सरकार का अनुमानित टैक्स राजस्व 2024-25 के लिए 58,750 करोड़ रुपये है, जबकि कुल बजट 76,000 करोड़ रुपये का है। इसमें से 16,396 करोड़ रुपये शिक्षा पर खर्च होते हैं, जो कुल बजट का 22% है। इसके अलावा, आवास, शहरी विकास, स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक कल्याण जैसी योजनाओं पर भी भारी खर्च किया जाता है। दिल्ली का वित्त विभाग पहले ही संभावित घाटे को लेकर चिंता जता चुका है, क्योंकि बजट का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और प्रशासनिक खर्चों में चला जाता है।

बीजेपी के चुनावी वादों को लागू करने के लिए दिल्ली सरकार को अतिरिक्त बजट की जरूरत होगी। उदाहरण के लिए, गरीब महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने की योजना पर ही सालाना 11,000 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। इसी तरह, 24.4 लाख वरिष्ठ नागरिकों को हर महीने 2,500 से 3,000 रुपये पेंशन देने के लिए सालाना करीब 4,100 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, यमुना की सफाई भी एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर पिछले कुछ वर्षों में 8,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी नदी की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

दिल्ली सरकार के अस्पतालों को अपग्रेड करने के लिए अनुमानित 10,200 करोड़ रुपये चाहिए होंगे, जबकि दिल्ली मेट्रो के विस्तार के लिए 2,700 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। स्पष्ट है कि इन सभी परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार को केंद्र से वित्तीय सहायता लेनी होगी। दिल्ली बीजेपी के प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा पहले ही संकेत दे चुके हैं कि केंद्र सरकार आर्थिक मदद देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा था कि पहले भी केंद्र सरकार ने दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू करने के लिए फंड देने की पेशकश की थी, लेकिन आम आदमी पार्टी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अब जब बीजेपी की सरकार बन गई है, तो पार्टी अपने वादों को पूरा करने के लिए धन की व्यवस्था करेगी, वित्तीय रिसाव को रोकेगी और भ्रष्टाचार को खत्म करेगी।

Read This Also:- तीन राज्यों के वरिष्ठ नेता BJP से नाराज, नोटिस जारी कर पार्टी ने कसा शिकंजा