Malegaon Blast Case: मोहन भागवत की गिरफ़्तारी का मिला था आदेश
मुजावर ने यह बयान सोलापुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान दिया, जो कि हाल ही में प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित सभी सात आरोपियों को NIA की विशेष अदालत द्वारा बरी किए जाने के फैसले पर उनकी प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया। महबूब मुजावर ने कहा, "मुझे मोहन भागवत, राम कलसांगरा, संदीप डांगे और दिलीप पाटीदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए मौखिक निर्देश दिए गए थे। लेकिन मेरे पास कोई वैध आधार नहीं था और न ही ऐसे आदेशों को अमल में लाने की शक्ति।"
मुजावर ने कहा कि चूंकि उन्होंने इन कथित आदेशों का पालन नहीं किया, इसलिए उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया और उनका 40 वर्षों का पुलिस करियर बर्बाद हो गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास इस पूरे मामले से संबंधित दस्तावेज़ी सबूत मौजूद हैं, जिन्हें वह आवश्यक होने पर सार्वजनिक करेंगे। मुजावर ने कहा कि कथित आदेशों का मकसद "भगवा आतंकवाद" के नैरेटिव को स्थापित करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरू में ATS की जांच पक्षपातपूर्ण थी और बाद में जब मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया, तब जाकर तथ्यात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया।
कोर्ट ने क्या कहा?
29 सितंबर 2008 को मालेगांव के भीकू चौक में एक मोटरसाइकिल में विस्फोट हुआ था, जिसमें 6 लोगों की मौत और 101 से अधिक लोग घायल हुए थे। मामले में बीजेपी नेता साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय और अन्य आरोपित बनाए गए थे।
लेकिन अब 17 साल बाद, 2025 में NIA की स्पेशल कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
जज लाहोटी ने अपने फैसले में लिखा कि आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका। सिर्फ नैरेटिव या संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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