हाई कोर्ट का RSS के पथ संचलन के प्रति समर्थन
मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) को पथ संचलन की अनुमति न मिलने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने थलपति विजय की सरकार की पुलिस से यह सवाल किया कि जब जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में RSS के कार्यक्रमों की अनुमति दी जाती है, तो तमिलनाडु जैसे शांतिपूर्ण राज्य में इसे क्यों रोका जा रहा है?
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि संघ का पथ संचलन जम्मू-कश्मीर में आयोजित किया जा सकता है, तो तमिलनाडु में इसकी अनुमति नहीं देना उचित नहीं है। अदालत की इस टिप्पणी ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया है।
यूट्यूबर ध्रुव राठी की कानूनी समस्याएं बढ़ीं
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने यूट्यूबर ध्रुव राठी को एक मामले में नए सिरे से समन जारी करने का आदेश दिया है। यह मामला 2018 में ध्रुव राठी द्वारा अपलोड किए गए एक वीडियो से संबंधित है।
विकास पांडे नामक एक व्यक्ति ने इस वीडियो को लेकर याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राठी ने भाजपा आईटी सेल के खिलाफ झूठे और अपमानजनक आरोप लगाते हुए एक यूट्यूब वीडियो जारी किया। इस मामले में कोर्ट द्वारा समन जारी करने से राठी की कानूनी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं।
मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में फांसी की सजा
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस दौरान महाभारत और गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि दंड भी धर्म का एक रूप है।
ज्ञात हो कि मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी, जिसके बाद शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में सीमेंट के साथ भर दिया गया था।
अभिजीत दीपके का 16 अक्तूबर का ऐलान
कोकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने 16 अक्तूबर को एक नया ऐलान किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आशुतोष रांका और सौरभ दास को तिरंगा लहराने के कारण जेल में डाल दिया है।
दीपके ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे 16 अक्तूबर की शाम पांच बजे तिरंगा लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में एकत्रित हों। उन्होंने कहा कि हम दिखा देंगे कि तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है।
दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों की स्थिति
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों में एक बड़ा वर्ग शामिल हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब विपक्ष भी इस मुद्दे पर सड़कों पर उतर आया है।
इस बीच, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के कुछ पूर्व भारतीय छात्रों ने इन प्रदर्शनों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि देश के संवैधानिक संस्थानों पर हमले उचित नहीं हैं।





