संस्थानिक अधिकारों पर जोर
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) को एक व्यक्ति के रूप में कोई विशेष अधिकार नहीं मिलना चाहिए। उनके अनुसार, अधिकारों का केंद्र पद पर बैठे व्यक्ति के बजाय पूरी संस्था पर होना चाहिए। उन्होंने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) की स्वतंत्रता और ईमानदारी की रक्षा के लिए मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता की बात की।
लाइव लॉ द्वारा रिपोर्ट की गई जानकारी के अनुसार, जस्टिस जोसेफ ने कहा, “सीईसी को खुद कोई खास अधिकार नहीं मिलना चाहिए। यह एक संस्था है, कोई व्यक्ति नहीं। दुर्भाग्य से, हमारे देश में ऊंचे संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को यह गलतफहमी है कि सत्ता केवल व्यक्ति के पास है। यदि यह संस्थागत सत्ता का प्रयोग है, तो आपको इस पर दो बार विचार करना चाहिए।”
सेमिनार में की गई महत्वपूर्ण बातें
जस्टिस जोसेफ ने यह टिप्पणी इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स, केरलम द्वारा आयोजित 'इंडिपेंडेंस ऑफ इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया: कॉम्प्रोमाइज्ड?' शीर्षक के सेमिनार में अपनी उद्घाटन भाषण में की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इलेक्शन कमिश्नरों की नियुक्ति और उनके सेवा संबंधी शर्तों को पार्लियामेंट्री कानून पर निर्भर करने के बजाय संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से सुरक्षित किया जाना चाहिए।
उन्होंने संविधान सभा की बहसों में चुनावों का संचालन करने वाले अधिकारियों की ईमानदारी के प्रति उठाई गई चिंताओं का उल्लेख किया। हृदय नाथ कुंजरू का उदाहरण देते हुए, जस्टिस जोसेफ ने चेतावनी दी कि चुनावों की देखरेख करने वाले अधिकारियों पर भरोसे की कमी लोकतंत्र को कमजोर कर सकती है।
लोकतंत्र की सुरक्षा की आवश्यकता
जस्टिस जोसेफ ने आगे कहा, “डॉ. हृदय नाथ कुंजरू ने उस पद पर बैठे व्यक्ति की ईमानदारी के बारे में बात की थी। यदि ईमानदारी सुनिश्चित नहीं है, तो लोकतंत्र को शुरुआत में ही जहर मिल जाएगा। क्या हम इन दिनों में यही नहीं देख रहे हैं? क्या लोकतंत्र को उन लोगों के हाथों जहर नहीं मिला है जो संविधान के अनुसार कार्य नहीं कर रहे हैं? इसलिए, मैं यही कहूंगा कि यह वह समय है जब देश को अपने लोकतंत्र की सुरक्षा के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और आवश्यक कदम उठाने चाहिए। अगर भारत के चुनाव आयोग जैसे बड़े संस्थानों को संवैधानिक शक्तियां दी जाती हैं, तो उनकी ईमानदारी और स्वतंत्रता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।”





