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विरोध प्रदर्शनों पर GST का असर, दिल्ली में बढ़ेंगे खर्च

जंतर-मंतर के स्थानांतरण से प्रदर्शन की लागत में वृद्धि हुई है।

विरोध प्रदर्शनों पर GST का असर, दिल्ली में बढ़ेंगे खर्च
फोटो: Impact of GST on Protests, Costs Rise in Delhi

जंतर-मंतर का स्थानांतरण

दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों के चलते केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। इसके स्थान पर रामलीला मैदान, सीबीएस ग्राउंड (शाहदरा) और बुराड़ी ग्राउंड को चिह्नित किया गया है। पहले लोग बिना किसी खर्च के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर सकते थे, लेकिन अब नए स्थानों पर प्रदर्शन करने के लिए आयोजकों को एक लाख रुपये से अधिक खर्च करना पड़ेगा।


इसके साथ ही, आयोजकों को इन स्थानों पर प्रदर्शन करने के लिए लंबा इंतजार भी करना पड़ सकता है। इसके अलावा, प्रदर्शन स्थलों पर लगने वाले शुल्क पर 18% जीएसटी का भुगतान भी करना होगा। इस प्रकार, दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना अब महंगा साबित हो रहा है।


रामलीला मैदान की लागत

जंतर-मंतर पर मुफ्त में प्रदर्शन की सुविधा बंद होने के बाद, रामलीला मैदान में एक दिन के प्रदर्शन के लिए बुकिंग की कुल लागत 1,21,080 रुपये है। इसमें सुरक्षा जमा राशि 50,000 रुपये, मैदान सुरक्षा शुल्क 5,000 रुपये, दैनिक किराया 50,000 रुपये, दैनिक सफाई शुल्क 4,000 रुपये, लाइसेंस शुल्क 2,000 रुपये और 18% जीएसटी 10,080 रुपये शामिल हैं।


इस प्रकार, रामलीला मैदान की बुकिंग के लिए कुल खर्च 1,21,080 रुपये आता है। NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि अब दिल्ली में प्रदर्शन करने के लिए आयोजकों को चुकानी होगी।


सीबीएस और बुराड़ी ग्राउंड की बुकिंग

सीबीएस ग्राउंड (शाहदरा) की बुकिंग के लिए, DDA के ऑनलाइन पोर्टल पर राजनीतिक गतिविधियों के लिए कोई स्पष्ट श्रेणी नहीं बनाई गई है। यहां 3,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र की एक दिन की बुकिंग के लिए कुल 1,07,614 रुपये खर्च होंगे, जिसमें सुरक्षा जमा, सफाई शुल्क और 18% जीएसटी शामिल हैं।


वहीं, बुराड़ी ग्राउंड के लिए बुकिंग की प्रक्रिया भी DDA की सूची में नहीं दिख रही है। बुराड़ी ग्राउंड की जगह भलस्वा ग्राउंड में दिखाई दे रही है, जहां 8,000 वर्ग मीटर जगह बुक करने के लिए 2,87,333 रुपये का भुगतान करना होगा। इसमें सुरक्षा जमा, सफाई का खर्च और टैक्स शामिल हैं। इस तरह, जंतर-मंतर के बंद होने के बाद दिल्ली में सामाजिक या राजनीतिक प्रदर्शन आयोजित करना एक महंगा कार्य बन गया है।