सरकार का आदेश और विरोध
केंद्र सरकार ने 11 अक्तूबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया। इसके स्थान पर तीन नए स्थानों को प्रोटेस्ट साइट के रूप में मान्यता दी गई है। इस निर्णय का विरोध कांग्रेस सहित कई संगठनों द्वारा किया जा रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका का प्रतिनिधित्व वकील स्वाति सिंह कर रही हैं, जिन्होंने इस निर्णय को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि विरोध-प्रदर्शनों को दूर-दराज के इलाकों में स्थानांतरित करने से शांतिपूर्ण संगठन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
विरोध-प्रदर्शन का अधिकार
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि विरोध-प्रदर्शन का अधिकार केवल किसी पूर्व निर्धारित स्थान पर एकत्र होने का अधिकार नहीं है, बल्कि यह अपनी समस्याओं को व्यक्त करने और सरकारी अधिकारियों का ध्यान आवश्यक मुद्दों की ओर आकर्षित करने का भी अधिकार है। इसलिए, प्रदर्शन स्थलों का चयन एक साधारण प्रशासनिक मुद्दा नहीं हो सकता।
याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित संस्थानों की नजदीकी, जनसमुदाय की पहुंच और लक्षित जनता के सामने मुद्दों को लाना, ये सभी तत्व विरोध-प्रदर्शन की प्रभावशीलता पर सीधे प्रभाव डाल सकते हैं।
प्रक्रियागत खामियां
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने 'मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018)' मामले का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को मनमानी और प्रक्रियागत रूप से अधूरी बताया है। खासकर इसलिए कि नए स्थानों के लिए संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अभी तक जारी नहीं किए गए हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों की योजना हमेशा पूर्व निर्धारित नहीं की जा सकती, क्योंकि ये सरकार के अचानक लिए गए फैसलों का जवाब हो सकते हैं। इसलिए, नए स्थानों तक पहुंचने के लिए SOP को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अधिकारों की रक्षा की मांग
याचिकाकर्ता ने कहा है कि किसी मौजूदा स्थान को हटाने का नोटिफिकेशन केवल इसलिए विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को संरक्षित नहीं कर सकता क्योंकि वैकल्पिक स्थानों का चयन किया गया है। यदि उन स्थानों तक पहुंचने के लिए विस्तृत इंतजाम बाद में आने वाले SOP पर निर्भर हैं, तो यह प्रक्रिया की स्पष्टता की कमी को दर्शाता है।
यह रिट याचिका लक्ष्य सैनी, वकील तुषार गुप्ता और स्वाति सिंह द्वारा दायर की गई है, जिसमें वरिष्ठ वकील मुक्ता गुप्ता और वकील नंदिता राव बहस करेंगी।





