Molitics Logo
होम राष्ट्रीय जंतर-मंतर मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई, छात्रों को हिरासत में लिया
राष्ट्रीय • दिल्ली

जंतर-मंतर मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई, छात्रों को हिरासत में लिया

दिल्ली में जंतर-मंतर मार्च के दौरान पुलिस ने छात्रों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े।

जंतर-मंतर मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई, छात्रों को हिरासत में लिया
फोटो: Jantar Mantar Protest | Gyanesh Kumar Resignation | Delhi Police Detention | Justice Morcha | SIR Voter List

दिल्ली में जंतर-मंतर को नियमित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। 2 अक्टूबर से जारी आंदोलन के तहत जस्टिस मोर्चा ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया से जंतर-मंतर तक मार्च निकालने का आह्वान किया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को प्रेस क्लब से करीब 100 मीटर आगे ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया। बाद में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई छात्रों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया।

 

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची में शामिल करने की मांग

प्रदर्शन में शामिल छात्र-युवाओं का कहना था कि जंतर-मंतर लंबे समय से किसानों, मजदूरों, महिलाओं और छात्रों के आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। उनका आरोप है कि इसे नियमित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड जैसे विकल्प दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि इन स्थानों पर आयोजन के लिए प्रतिदिन करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक खर्च हो सकता है। उनके मुताबिक, इससे गरीबों और आम नागरिकों के लिए विरोध दर्ज कराना मुश्किल होगा।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है, तो इसके लिए इतनी बड़ी रकम खर्च करने की बाध्यता क्यों होनी चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल घोषित करने की मांग की।

 

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर सवाल

जस्टिस मोर्चा से जुड़े छात्र-युवाओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उनका आरोप था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि करीब 13 करोड़ नागरिकों के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, यह आंकड़ा और इससे जुड़े आरोप प्रदर्शनकारियों के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की जवाबदेही, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े 2023 के कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि सरकार और चुनाव आयोग आंदोलनकारियों की चिंताओं का जवाब दें।

 

बैरिकेडिंग के बाद हिरासत, पुलिस ने दी कार्रवाई की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान छात्र-युवा बैरिकेडिंग के पास बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर भी चढ़े। पुलिस ने लाउडस्पीकर से प्रदर्शनकारियों को वहां से हटने और अपनी सभा समाप्त करने को कहा। पुलिस की ओर से चेतावनी दी गई कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। घटनास्थल पर मौजूद रिपोर्टर के अनुसार, कुछ छात्रों को पुलिसकर्मी उठाकर बसों तक ले गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई को बर्बर बताया, जबकि मौके पर भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग तैनात रही।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और युवाओं ने कहा कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद वे आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना था कि जंतर-मंतर केवल एक प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विरोध और जनता की आवाज का प्रतीक है। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि वे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल बनाए जाने की मांग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर - https://youtu.be/zVPYZMUhyWc?si=OMkKQb1z94aM-jn-

Video