Molitics Logo
होम राष्ट्रीय Uttar Pradesh विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से नाम काटने पर बड़ा खुलासा: सॉफ्टवेयर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
राष्ट्रीय • उत्तर प्रदेश

Uttar Pradesh विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से नाम काटने पर बड़ा खुलासा: सॉफ्टवेयर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

UP चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से नाम काटने पर बड़ा खुलासा, सॉफ्टवेयर के जरिए बिना कारण के फॉर्म जनरेट होने पर उठे सवाल।

Uttar Pradesh विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट से नाम काटने पर बड़ा खुलासा: सॉफ्टवेयर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
फोटो: Uttar Pradesh Voter List, SIR Process Election Commission, EroNet Software Deletions, Chief Electoral Officer UP, Form 7 Voter Deletion

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची (Voter List) के विशेष पुनरीक्षण और संशोधन (SIR) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर 'इरोनेट' (EroNet) ने नियमों को ताक पर रखकर हजारों वोटरों के नाम हटाने वाले फॉर्म स्वचालित (Automatic) तरीके से तैयार किए।

 

सॉफ्टवेयर के जरिए बिना कारण के फॉर्म और अफसरों की मजबूरी

रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 तक यूपी में 15.44 करोड़ वोटर दर्ज थे, जिनमें से लगभग 2.89 करोड़ वोटरों को एएसडी (ASD - Absent, Shifted, Dead, Duplicate) लिस्ट में डाला गया था। इसके बाद लगभग 3.26 करोड़ संदिग्ध वोटरों की सुनवाई हुई, और अंततः 10 अप्रैल को जारी फाइनल वोटर लिस्ट में 13.40 करोड़ वोटर ही बचे यानी करीब 2 करोड़ लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए।

जांच में सामने आया कि अधिकारियों द्वारा दाखिल किए गए 4,300 से अधिक फॉर्म सेवन में से लगभग 20% यानी 87,187 फॉर्म सीधे चुनाव आयोग के असेंबली स्तर के अफसरों (ERO और AERO) के नाम से जमा किए गए थे। इनमें से लगभग 98.5% (85,854) फॉर्म ऐसे थे जिनमें नाम काटने का कोई कारण ही दर्ज नहीं था। आरोप है कि सॉफ्टवेयर की डिजाइनिंग ऐसी थी कि अफसरों के पास बिना कोई कारण बताए इन फॉर्म्स पर डिजिटल हस्ताक्षर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। नियमों के मुताबिक बिना कारण या समय-सीमा के बाद आए आपत्तियों को सीधे खारिज किया जाना चाहिए था, लेकिन वे सिस्टम में प्रोसेस होते रहे।

 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बयान और विवाद

इस खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने वीडियो जारी कर रिपोर्ट को भ्रामक बताया, लेकिन अपने ही स्पष्टीकरण में उन्होंने इस बात की पुष्टि कर दी कि सॉफ्टवेयर ने अधिकारियों को बिना कारण बताए फॉर्मों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया था। विपक्षी दलों और विश्लेषकों ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और पारदर्शी चुनाव प्रणाली पर बड़ा प्रहार बताया है।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-https://youtu.be/IO9m9ev0wgw?si=QIYBytCETYoXjnu7

Video