मुंबई: मुंबई के जुहू इलाके में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग की घटना ने एक बार फिर देश में संगठित अपराध और लॉरेंस बिश्नोई के कथित नेटवर्क पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 18 अक्टूबर 2026 की शाम हुई इस गोलीबारी में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए, हालांकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर है। हमले के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर अनिल पंडित और अरमान संधू के नाम से एक कथित संदेश सामने आया, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर जिम्मेदारी लेते हुए सलमान खान या उनके साथ काम करने वाले हर व्यक्ति को निशाना बनाने की खुली धमकी दी गई है।
कोटा से तीन संदिग्ध शूटर गिरफ्तार, जांच तेज
इस सनसनीखेज मामले की गंभीरता को देखते हुए केस मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। 19 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजस्थान के कोटा से तीन संदिग्ध शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में यह मामला लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़ा माना जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं और साजिश के असली मकसद की गहराई से छानबीन कर रही है।
साबरमती जेल से नेटवर्क संचालन पर उठते सवाल
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि लॉरेंस बिश्नोई मई 2023 से गुजरात की उच्च सुरक्षा वाली साबरमती जेल में बंद है, इसके बावजूद उसके नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों में धमकियां, फिरौती और वारदातों का सिलसिला लगातार जारी है। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, बाबा सिद्दीकी की हत्या, सलमान खान के गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर फायरिंग और अब टाइगर श्रॉफ की कार पर हमला—इन तमाम घटनाओं ने जेल प्रशासन और निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
गृह मंत्रालय ने अगस्त 2025 में बिश्नोई को जेल से बाहर ले जाने पर रोक को एक साल और बढ़ा दिया था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जेल की सलाखों के पीछे आरोपी को कैद रखना और उसके वित्तीय लेन-देन, संचार साधनों तथा आपराधिक नेटवर्क को पूरी तरह निष्क्रिय करना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं। राजनीतिक मोर्चे पर भी इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
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