नई दिल्ली: जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर छात्र संघ (Student Union) की बहाली और अन्य मांगों को लेकर पिछले सात दिनों से छात्रों की भूख हड़ताल (हंगर स्ट्राइक) जारी है। इस आंदोलन के दौरान 17 अक्टूबर की सुबह लगभग 5 बजे यूनिवर्सिटी प्रशासन और भारी संख्या में गार्ड्स द्वारा कथित तौर पर क्रूरतापूर्वक कार्रवाई करते हुए छात्रों को खदेड़े जाने का मामला सामने आया है।
छात्रों के गंभीर आरोप और प्रमुख मांगें
हंगर स्ट्राइक पर बैठे छात्रों का कहना है कि पिछले 20 सालों से जामिया में स्टूडेंट यूनियन बंद है, जिसे बहाल किया जाना चाहिए। छात्रों ने आरोप लगाया कि 17 अक्टूबर की सुबह लगभग 100 गार्ड्स और कुछ सिविल ड्रेस वाले लोगों ने सोते हुए छात्रों पर हमला किया, उनके साथ हाथापाई की और उन्हें जबरन कैंपस से बाहर फेंक दिया। इस दौरान कई छात्र घायल हो गए और कुछ के स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।
छात्रों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
-
जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ (Student Union) को तुरंत बहाल किया जाए।
-
प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर किए गए सभी अनुशासनात्मक कार्रवाई, नोटिस और कैंपस बैन (Suspension) को वापस लिया जाए।
-
घटना के लिए जिम्मेदार चीफ प्रॉक्टर और सिक्योरिटी एडवाइजर अपने पद से इस्तीफा दें।
प्रशासन की कार्रवाई और छात्रों का संघर्ष
घटना के बाद प्रशासन ने कई छात्रों को नोटिस जारी कर छह महीने से एक साल तक का कैंपस बैन लगा दिया है, जिसमें छात्रों का दावा है कि उनके वैध प्रवेश (Admission) और आईडी कार्ड होने के बावजूद उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। बावजूद इसके, छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और कैंपस के बाहर तथा भीतर लगातार डटकर विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं।





