राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर और उसके आसपास का इलाका इन दिनों एक छावनी में तब्दील हो चुका है। विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंचे नागरिकों, राहगीरों और यहाँ तक कि लाइव रिपोर्टिंग कर रहे स्वतंत्र पत्रकारों को भी दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा जबरन हिरासत (डिटेन) में लेने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। सुबह-सुबह ही शुरू हुई इस प्रशासनिक सख्ती ने एक बार फिर नागरिकों के मौलिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की आजादी और पुलिस के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जंतर-मंतर पर सुबह-सुबह पुलिसिया मुस्तैदी और रैंडम डिटेंशन
सुबह से ही जंतर-मंतर की सड़क पर तनावपूर्ण और अत्यधिक सुरक्षा वाला माहौल देखने को मिला, जहाँ प्रशासन किसी भी जन-आंदोलन को अंकुश में रखने के लिए पूरी ताकत से मुस्तैद था। मौके पर मौजूद स्वतंत्र पत्रकारों और रिपोर्टर्स के अनुसार, जंतर-मंतर के आसपास जो लोग शांतिपूर्वक खड़े थे या जो इक्का-दुक्का लोग वहां से गुजर रहे थे, उन्हें बिना किसी चेतावनी के तुरंत हिरासत में लिया जाने लगा। हालात यह थे कि नियमों के तहत तय संख्या या भीड़ न होने के बावजूद पुलिस ने रैंडम तरीके से लोगों को उठाना शुरू कर दिया।
इस कार्रवाई के दौरान एक बेहद अजीब मामला भी सामने आया, जहाँ एक लड़के को केवल इसलिए हिरासत में ले लिया गया क्योंकि उसकी टी-शर्ट पर एक खास राजनीतिक प्रतीक और वैचारिक टिप्पणी छपी हुई थी। पुलिस ने टी-शर्ट और अभिव्यक्ति के इस माध्यम को भी डिटेंशन का आधार बना लिया, जिससे यह साफ हो गया कि प्रशासन असहमति के हर छोटे-छोटे प्रतीक को कुचलने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मीडिया और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला
इस पूरी कवरेज के दौरान यह बात सबसे प्रमुखता से सामने आई कि प्रशासनिक मशीनरी केवल प्रदर्शनकारियों ही नहीं, बल्कि जमीन पर सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों को भी अपना निशाना बना रही है। रिपोर्टर्स और कैमरामैन जब जंतर-मंतर की सड़क पर खड़े होकर जमीनी हकीकत दिखा रहे थे, तब पुलिसकर्मियों और पैरामिलिट्री फोर्स ने उन्हें जबरन धक्का देकर पीछे हटाना शुरू कर दिया।
पत्रकारों के माइक पर हाथ हटाए गए, कैमरों को ढकने की कोशिश की गई और उन्हें लाइव कवरेज करने से रोकने के लिए बल प्रयोग किया गया। मीडियाकर्मियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली की सड़कों पर पुलिस का जो बर्बर और असंवैधानिक रवैया देखने को मिल रहा है, वह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर जनता की आवाज़ और सच को दबाने का एक सुनियोजित प्रयास है। भाषा और आचरण में संयम की जगह पूरी तरह से दबंगई दिखाई दे रही थी, और ड्यूटी पर तैनात अधिकारी भी कैमरों के सामने जवाब देने से बचते नजर आए।
छावनी में तब्दील इलाका और केंद्रीय सुरक्षा बलों का पहरा
नई दिल्ली के जंतर-मंतर और जनपथ लेन वाले पूरे क्षेत्र को सुरक्षा बलों ने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है। दिल्ली पुलिस के अलावा भारी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स की टीमों को तैनात किया गया है। नई दिल्ली के उस पूरे इलाके में कड़े चेक पॉइंट बनाए गए हैं। स्थिति ऐसी बना दी गई है मानो यह दिल्ली का कोई आम नागरिक क्षेत्र न होकर किसी युद्ध या अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर का इलाका हो। इंटरनेट सेवाओं पर रोक, मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करना और आवाजाही पूरी तरह ठप करने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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