रिपोर्टिंग के दौरान माइक और फोन छीना, सहयोगियों को भी बस में बैठाया; स्वतंत्र पत्रकारिता और पुलिस की जवाबदेही पर उठी चिंता
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया है। पत्रकार अनमोल ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग करते समय पुलिसकर्मियों ने उनका माइक नीचे किया, फोन छीनने की कोशिश की और उन्हें जबरन एक बस में बैठा दिया। अनमोल के मुताबिक, उनके प्रोड्यूसर और अन्य पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को पत्रकारिता की स्वतंत्रता और स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए चिंताजनक बताया।
रेलवे स्टेशन के पास हुई कार्रवाई
अनमोल ने बताया कि वह कनॉट प्लेस से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर गए थे। रास्ते में उन्हें सड़क पर खड़ी एक बस दिखाई दी, जिसमें कुछ लोगों को हिरासत में रखा गया था। इनमें महिलाएं और पुरुष शामिल थे। वह उनसे बातचीत कर रहे थे कि पुलिस अधिकारी धन सिंह मलिक अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे।
अनमोल के अनुसार, अधिकारी ने उनका माइक पकड़कर नीचे किया और उन्हें बस में बैठाने का आदेश दिया। उन्होंने खुद को मीडिया से जुड़ा बताते हुए विरोध किया, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें खींचा और उनके फोन छीनने की कोशिश की। उनका प्रोड्यूसर भी मौके पर मौजूद था, जिसका फोन भी कथित तौर पर छीन लिया गया। दोनों को बस में बैठा दिया गया।
बस में अन्य पत्रकार भी मिले
अनमोल ने बताया कि बस में अर्धसैनिक बल के जवान और महिला पुलिसकर्मी तैनात थे। उन्होंने अपना फोन वापस मांगा तो कथित तौर पर उन्हें चुप रहने को कहा गया। बाद में उन्होंने बस के भीतर से अन्य पत्रकारों को भी हिरासत में लाते देखा और अपने फोन से वीडियो बनाने लगे। उनके मुताबिक, इसके बाद उनका दूसरा फोन भी छीन लिया गया।
उन्होंने बताया कि उनके सहयोगी अश्विन और आस्था वहां पहुंचे और पुलिस को बताया कि वे न्यूज़लॉन्ड्री से जुड़े मीडिया कर्मी हैं। अनमोल का आरोप है कि अधिकारी ने जवाब दिया कि यहां कोई मीडिया नहीं है और उन्हें भी हिरासत में लेने का आदेश दिया। उनके मुताबिक, आस्था को बस में बैठाते समय वह गिर गईं। बाद में सभी को छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया, जहां प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें करीब ढाई से तीन घंटे में छोड़ा गया।
दिल्ली में कई स्तरों की बैरिकेडिंग का दावा
अनमोल के अनुसार, रास्ते में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, कनॉट प्लेस, मिंटो ब्रिज और आईटीओ की ओर कई स्तरों पर बैरिकेडिंग लगी थी। उनका कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों को ले जा रही बस को भी रास्ता साफ कराने में समय लगा। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग इलाकों में अन्य पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया था। उनके अनुभव के आधार पर उन्होंने इसे केवल गलतफहमी नहीं, बल्कि पत्रकारों की रिपोर्टिंग सीमित करने वाली समन्वित कार्रवाई बताया।
रिपोर्टिंग की स्वतंत्रता पर चिंता
अनमोल ने कहा कि पुलिस पत्रकारों को यह बताती रही कि वे किस जगह से रिपोर्टिंग कर सकते हैं। उनके मुताबिक, इससे पत्रकारों की स्वतंत्र रूप से घटनाओं को कवर करने की क्षमता प्रभावित हुई। उन्होंने जोर दिया कि पत्रकार किसी प्रदर्शन में हिस्सा लेने नहीं, बल्कि पुलिस, प्रदर्शनकारियों और प्रभावित लोगों—सभी का पक्ष सामने रखने जाते हैं। उनके अनुसार, पुलिस की कार्रवाई को रिकॉर्ड करना भी पत्रकारिता का हिस्सा है।
उन्होंने बीएनएस की धारा 163 के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए और कहा कि वीडियो में स्थानीय लोगों को भी पूछताछ या रोक-टोक का सामना करते देखा गया, जिनमें कुछ लोग दूध या सब्जी लेने जा रहे थे।
अनमोल ने चिंता जताई कि यदि इस तरह की कार्रवाई सामान्य बनती है, तो ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए स्थिति और कठिन हो सकती है, क्योंकि उनके पास बड़े मीडिया संस्थानों जैसी सुरक्षा और पहुंच हमेशा उपलब्ध नहीं होती।





