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'चलो दिल्ली' मार्च: संविधान क्लब से सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक का ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन

12 खंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक का मार्च, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।

'चलो दिल्ली' मार्च: संविधान क्लब से सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक का ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन
फोटो: India Alliance March Delhi, Supreme Court Protest, Jignesh Mevani Delhi, Chief Election Commissioner, Opposition Delhi Rally

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' (INDIA Alliance) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवाद, मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियों, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक विरोध मार्च निकाला। "चलो दिल्ली – मार्च फॉर डेमोक्रेसी" के तहत आयोजित इस विशाल विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), शिवसेना (UBT), तृणमूल कांग्रेस (TMC), वामपंथी दलों, छात्र संगठनों (AISA, SFI, NSUI) और देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों कार्यकर्ताओं, वकीलों व आम नागरिकों ने हिस्सा लिया।

 

1. संविधान क्लब में 'चाय पे चर्चा' और नेताओं की मौजूदगी

सोमवार की सुबह नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसके बाद नेताओं का काफिला बसों और पैदल मार्च के जरिए 12 खंभा रोड और कनॉट प्लेस (CP) की तरफ बढ़ा।

इस मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, तेजस्वी यादव, संजय राउत, प्रियंक खड़गे, पप्पू यादव, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जिग्नेश मेवानी और वामपंथी व छात्र नेताओं समेत विपक्ष के तमाम दिग्गज चेहरे शामिल हुए। बसों और जुलूस के साथ हजारों की संख्या में लहराते राष्ट्रीय ध्वज और संविधान की प्रतियां लिए कार्यकर्ताओं का हुजूम मौजूद था।

 

2. सीजेआई (CJI) से मुलाकात की कोशिश और कानूनी कदम

विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ और एसआईआर प्रक्रिया में कथित अवैधताओं को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर विस्तृत हलफनामा व ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, न्यायपालिका की तटस्थता और मामले के विचाराधीन (Sub Judice) होने के कारण व्यक्तिगत मुलाकात की मांग को आगे नहीं बढ़ाया जा सका, जिसके बाद लीगल टीम ने सुप्रीम कोर्ट की ई-फाइलिंग के माध्यम से अपनी आधिकारिक याचिका दर्ज कराई।

 

3. पुलिस की कड़ी नाकेबंदी, धारा 163 और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मार्च को नियंत्रित करने और रोकने के लिए दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के भारी जवानों को तैनात किया गया था। मध्य दिल्ली क्षेत्र में धारा 163 लागू कर दी गई थी।

  • 3-लेयर बैरिकेडिंग: 12 खंभा रोड, मंडी हाउस और सुप्रीम कोर्ट जाने वाले मार्गों पर लोहे के मजबूत बैरिकेड्स और वाटर कैनन तैनात थीं।

  • डिटेंशन बसों की तैनाती: प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए जगह-जगह बसें खड़ी की गई थीं, जहां कई कार्यकर्ताओं को सांकेतिक हिरासत में भी लिया गया।

 

4. देश भर से पहुंचे युवाओं, छात्रों और कार्यकर्ताओं का जनसैलाब

इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश (रामपुर, हापुड़), बिहार, हरियाणा (हांसी), छत्तीसगढ़ (रायपुर), राजस्थान और मध्य प्रदेश से हजारों युवा, किसान, वकील और छात्र पहुंचे थे।

जमीनी स्तर पर वक्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

  • लोकतंत्र और अधिकारों की लड़ाई: प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का विरोध नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक के मतदान के अधिकार और संविधान को बचाने की अंतिम लड़ाई है।

  • पत्रकारों और वकीलों पर निशाना: वक्ताओं और लीगल फ्रेटरनिटी ने आरोप लगाया कि राज्य मशीनरी और पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों को टारगेट किया जा रहा है, जो अघोषित आपातकाल का प्रतीक है।

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