यह चुनाव एक तरफ काम की राजनीति और दूसरी तरफ गाली-गलौज की राजनीति का मुकाबला होगा। दिल्ली की जनता का विश्वास हमारे कामकाजी और जनहित के एजेंडे के साथ रहेगा, और हम इस चुनाव में विजयी होंगे।"
आम आदमी पार्टी दिल्ली में लगातार चौथी बार सत्ता में आने का इरादा रखती है। हालांकि, पार्टी को इस बार 10 साल की एंटी-इनकंबेंसी का भी सामना करना होगा, जिसके कारण उन्हें कुछ चुनौतियाँ पेश आ सकती हैं। आम आदमी पार्टी का मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) से है, जो पूरी तरह से चुनावी मैदान में है और सरकार के खिलाफ मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस भी इस बार पूरी ताकत से मुकाबला करने के लिए मैदान में उतरी है, जिससे चुनाव त्रिकोणीय होने की संभावना बन रही है, जबकि कांग्रेस पहले लगातार तीन चुनावों में हार चुकी थी।
भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में विभिन्न मुद्दों को जोर-शोर से उठाकर आम आदमी पार्टी को घेरने की कोशिश की है। भाजपा के नेताओं ने "शीशमहल" और कथित शराब घोटाले जैसे मामलों को उठाया है, साथ ही यमुना प्रदूषण और दिल्ली के कुछ हिस्सों में गंदे पानी की आपूर्ति को भी लेकर 'आप' सरकार को निशाने पर लिया है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी का कहना है कि अगर भाजपा दिल्ली में सत्ता में आई, तो वह मुफ्त योजनाओं को बंद कर देगी। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर पर कहा है कि भाजपा सरकार इन मुफ्त योजनाओं को बंद नहीं करेगी, और यह जनता के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आम आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पिछली बार 2015 में 'आप' ने विधानसभा चुनाव में 67 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी, जबकि 2020 में पार्टी ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार भी पार्टी का लक्ष्य राजधानी में अपनी सत्ता को कायम रखना है, और इसके लिए सभी कार्यकर्ता पूरी मेहनत और जोश के साथ चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।





