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Delhi Polls: केजरीवाल पर सनातन धर्म का "अपमान" करने का BJP नेता वीरेंद्र सचदेवा का गंभीर आरोप

सचदेवा ने कहा कि केजरीवाल अपनी राजनीतिक रैलियों में बार-बार सनातन धर्म का अपमान करते हैं और रामचरितमानस की गलत व्याख्या करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते है

Delhi Polls:  केजरीवाल पर सनातन धर्म का "अपमान" करने का BJP नेता वीरेंद्र सचदेवा का गंभीर आरोप
फोटो: Sanatan Dharma, BJP, Virendra Sachdeva
वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) धार्मिक भावनाओं का दोहरा चेहरा रखती है, क्योंकि चुनाव नजदीक आते ही उनका मंदिरों में अचानक बढ़ता झुकाव दिखता है। सचदेवा ने कहा कि केजरीवाल अपनी राजनीतिक रैलियों में बार-बार सनातन धर्म का अपमान करते हैं और रामचरितमानस की गलत व्याख्या करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केजरीवाल की चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह एक ओर मंदिरों में जाकर हिंदू धर्म के प्रतीकों का सहारा लेते हैं, वहीं दूसरी ओर चुनावों के बाद उनकी असली मंशा सामने आती है।

सचदेवा ने यह भी कहा कि केजरीवाल ने पहले राम मंदिर बनाने का विरोध किया था, लेकिन अब चुनावों के दौरान उन्हें मंदिरों की याद आ रही है। उन्होंने दिल्ली में मंदिरों का दौरा कर केजरीवाल की इस दोहरी राजनीति को बेनकाब करने का प्रयास किया। उन्होंने सोमवार को भी अरविंद केजरीवाल पर घोगा भवन नरेला में सफाई कर्मचारियों और मजदूरों के लिए आवासीय फ्लैटों के निर्माण में बाधा डालने का आरोप लगाया, जहां केंद्रीय सरकार ने पर्याप्त फंड मुहैया कराया था। सचदेवा ने दावा किया कि केजरीवाल ने गरीबों के लिए बने इन फ्लैटों को अवरुद्ध कर दिया था, ताकि वह अपने चुनावी एजेंडे के तहत लोगों को लाभ न पहुंचा सकें।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए एकजुटता दिखा रहा है, जबकि आप और कांग्रेस गठबंधन के बीच आपस में तनातनी देखी जा रही है। आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा ने अपनी उम्मीदवारों की सूची भी पूरी कर ली है, जिसमें 68 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए गए हैं। बुराड़ी और देवली की दो सीटें जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी के लिए छोड़ी गई हैं, जबकि बाकी सभी सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी अपनी तैयारियों में जुटे हैं।

इस बीच, दिल्ली में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, जिससे चुनावी माहौल गर्माता जा रहा है। चुनाव आयोग भी दोनों पार्टियों के बीच बढ़ते विवादों को देख रहा है और चुनाव प्रचार पर निगरानी रख रहा है। यह चुनाव, न सिर्फ दिल्ली की राजनीति के भविष्य का संकेत देगा, बल्कि पूरे देश में 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी एक बार फिर से हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का संकेत देगा।

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