ज्योतिरादित्य को भाजपा ने नहीं, उन्हीं के प्रतिनिधि ने हराया !!
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ज्योतिरादित्य को भाजपा ने नहीं, उन्हीं के प्रतिनिधि ने हराया !!

Author: Nilanjay Tiwari calender  24 May 2019

ज्योतिरादित्य को भाजपा ने नहीं, उन्हीं के प्रतिनिधि ने हराया !!

गुना लोकसभा,
साल 2019 के लोकसभा चुनाव,
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज मंच से मौजूद जनता को सम्बोधित करते हैं

और कहते हैं 'अबकि बार गुना में भी बीजेपी लंका फतह करेगी, विभीषण के बदौलत' !!

आखिर वो विभीषण कौन है, जिसका यहां जिक्र किया गया.

ये भी बताऊंगा आपको, उससे पहले जानते हैं गुना सीट का महत्व क्या है ?

मध्य प्रदेश की गुना सीट को राज घराने के सिंधिया परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है. यहां की लोकसभा सीट पर तीन पीढ़ियों से सिंधिया घराने का कब्जा रहा है. सबसे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयराजे 6 बार उनके बाद उनके बेटे माधवराव सिंधिया ने 4 बार उनके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी 4 बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था. ये जो मैंने बताया, ये गुना सीट का सिर्फ इतिहास है जो दिलचस्प बात है वो अब बताता हूँ. गुना से कांग्रेस अपने प्रत्याशी के तौर पर 4 बार से संसद रहे ज्योतिरादित्य को उतारती है और भाजपा, पी यादव को. जो एक बार विधायकी लड़े और हारे भी. के पी यादव का परिचय इतना भी छोटा नहीं है. यह बात शायद सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शिनी भूल गयी थी. तभी उन्होंने एक रोज सोशल मीडिया पर एक फोटो डाल केपी यादव का मजाक उड़ाया और लिखा 'जो कभी महाराज के साथ सेल्फी लेने की होड़ में लगे रहते थे, भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी चुना है.'

लेकिन दिन बदले और हालत भी चुनाव के नतीजे आए तो शिवराज की बात सत्य दिखी और केपी यादव की जीत हुई. खुद ज्योतिरादित्य उन्हें सोशल मीडिया पर बधाई देते दिखे. लेकिन कहानी यहाँ पूरी नहीं होती.

शिवराज ने केपी यादव को विभीषण क्यों कहा ?

केपी साल 2004 से सक्रिय राजनीति में आए और सिंधिया सांसद प्रतिनिधि बने. मध्य प्रदेश के मुंगावली विधायक के निधन के बाद वहां उपचुनाव होना था और केपी को उम्मीद थी कि उन्हें टिकट मिलेगा. केपी यादव ही टिकट के दावेदार भी थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया. इस उपचुनाव में बृजेन्द्र सिंह यादव को टिकट दिया गया और वो जीत भी गए. केपी यादव ने नाराज होकर सिंधिया का साथ और पार्टी छोड़ दी फिर बीजेपी ज्वाइन कर ली साल 2018 के विधान सभा चुनावों में बीजेपी ने केपी यादव को मुंगावली टिकट भी दिया लेकिन वो करीबी अंतर से चुनाव हार गए. लोकसभा में फिर बीजेपी ने उनपर दांव चला और इस बार विभीषण ने लंका फतेह कर ली.

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