उनकी जात "राजनीति" है हमें सम्भलना होगा वरना . . .
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उनकी जात "राजनीति" है हमें सम्भलना होगा वरना . . .

Author: Nilanjay Tiwari calender  22 Feb 2019

उनकी जात "राजनीति" है हमें सम्भलना होगा वरना . . .

मुझे तो ये लगता है जैसे

किसी ने ये साज़िश रची है,

के लफ्ज़ और मानी में जो रिश्ता है
उसको जितना भी मुमकिन हो कमजोर कर दो |
 

अचानक एक हमला, एक नाकामी से ना ही सिर्फ 40 जवानों की मौत होती है बल्कि देश में अँधेरा छा जाता है. चेहरे पर मातम और दिल में गुस्सा साफ़ साफ़ नजर आने लगता है लेकिन सिर्फ इंसानों के, खद्दरधारी प्रजातियों के नहीं. फिरसे एक बार कवायद बड़े स्तर पर शुरू हो जाती है देश में नफरत और बटवारे की आग बढ़ाने को, शान्ति की होलिका जलाने को और अशांति की मशाल लिए देश भक्ति साबित करने को. कुछ ऐसा ही हुआ इस बार भी और सब सहमे ही थे की कुछ "आवारा लुच्चों" ने अपनी हरकतों से एक बार फिर देश को शर्मिंदगी से सर झुकाने के लिए मजबूर कर दिया.

सोशल मीडिया पर कुछ लोग डर कर पोस्ट करने लगे और कुछ देश भक्ति की आग में अपने पागलपन का सुबूत देने लगे, फरक नहीं पड़ता लेकिन "आस-पास की घटनाओं से यदि आपको फर्क नहीं पड़ता और आप आहत नहीं होते तो पत्रकारिता आपके लिए नहीं है" ख़ास कर तब जब आपके अपने लोग डर से डर को छुपाने के लिए अपनी एकता और बहादुरी बताते हुए पोस्ट लिखने पर मजबूर हो जाए.

मैं उनसे यही पूछना चाहूंगा की क्या कभी आपको किसीने "कश्मीरी" होने के लिए प्रताड़ित किया, क्या आपने दूसरे प्रदेश के लोगों से कभी बदतमीज़ी की, अगर नहीं तो मत डरिए आप क्योंकि ये जो हो रहा है वो सिर्फ आपको व हमको डराने और चुप कराने व मुद्दों से भटकाने के लिए ही तो हो रहा है. ये वही कुछ गिने चुने लोग हैं जिन्हे "खद्दरधारी" प्रजाति द्वारा पाला पोसा और उकसाया जा रहा है. इनकी उलूल-जुलूल हरकतों से
 

क्या एक बहन अपने भाई को राखी बांधने कश्मीर से दूसरे प्रदेश जाना बंद कर देगी ?

क्या वादियों का शौखीन कश्मीर जाना बंद कर देगा ?

क्या गली में असलम भाई की गूंजती "काश्मीरी शाल वाला, पश्मीना सूट वाला" की आवाज़ आनी बंद हो जाएगी ?
 

कभी नहीं,

           ये इन खद्दरधारियों की प्रजाति असल में अमन चैन चाहती ही नहीं है. इन्हीं के द्वारा एजेंडा सेट कर हर एक चीज को फैलाया जाता है #Hashtag trend कराया जाता है और हमारे व आपके दिलो दिमाग में नफरत, बटवारा, बदले की भावना की चिंगारी लगायी जाती है जिससे हम खुद आपस में लड़ने भिड़ने लगते हैं. जिस तरह से कश्मीर प्रदेश में कुछ गिने चुने लोगों को "लुच्चा" बनाकर अशांति फैलाई जा रही है ठीक वैसे ही बाकी प्रदेश में भी बड़े स्तर पर खद्दरधारियों द्वारा एक अभियान चलाकर युवाओं को "लुच्चा" बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. ये वही लोग है जो वहां पत्थरबाजी और यहां बाहरी प्रदेश के युवाओं को प्रताड़ित करने का काम रहे हैं. वरना अभी भी
 

गली मोहल्ला असलम भाई की आवाज से गूंजने को बेताब है,

फिरसे एक भाई को रक्षाबंधन का इंतजार है,

अभी भी लोग गुलमर्ग-डल लेक देखना चाहते हैं,

अभी भी बाइकर्स "लेह" तक का सफर करने की चाह रखते हैं,

अभी भी हम आपकी तरह ही "कश्मीर" को स्वर्ग ही मानते हैं.
 

ये जो सोशल मीडिया पर हो रहा कृपया उसका हिस्सा मत बनिए "हम-आप" वही हैं. बदली है तो घटनाएं उनका स्वरुप और समय व जगह. बाकी इसको कराने वाले वही हैं, करने वाले वही हैं और "भोगने" वाले भी वही "हम-आप" ही हैं.

 

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