D-Company को दाऊद नहीं डोभाल से जोड़िए
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D-Company को दाऊद नहीं डोभाल से जोड़िए

Author: Neeraj Jha calender  17 Jan 2019

D-Company को दाऊद नहीं डोभाल से जोड़िए

"न तो खाने दूँगा न खाऊँगा मै

था गया संसद में ये कहता हुआ 

चुप है भरती पॉकेटों पर आज वो 

राम जाने रहनुमा को क्या हुआ" 

डी कंपनी को अब दाऊद नहीं डोभाल के नाम से जानिए। कारवां मैग़ज़ीन में एनएसए अजीत डोभाल के बेटों की कंपनियों का विस्तृत रिपोर्ट आँखे मलने को मजबूर कर देता है। क़िस्सा कुछ ऐसा है कि बाप गाँधी की प्रतिमा पर फूल चढ़ा रहा है और बेटे गोड्से की पूजा कर रहे हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल के बेटे विवेक डोभाल 21 नवंबर 2016 - केमैन आइलैंड में एक हेज फंड पंजीकृत कराते हैं। 

हेज फँड मतलब कि वह फंड जहाँ निवेशक पैसा इकट्ठा करते हैं और बाद में इस पैसे को अलग अलग कंपनियों या देश में लगाया जाता है। 

कंपनी केमैन आइलैंड में स्थापित की जाती है। केमैन आइलैंड एक टैक्स हेवन है। मतलब ऐसा देश जहाँ कॉर्पोरेट टैक्स न के बराबर लगता है। केमैन आइलैंड को टैक्स चोरों के गिरोह का अड्डा माना जाता है। 

यह केमैन आइलैंड वही देश है, नोटबंदी के बाद, जहाँ से सर्वाधिक विदेशी निवेश हमारे देश में आया था। नोटबंदी के एक साल बाद यानी 2017 में केमैन आइलैंड से होने वाले निवेश में 2226 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

अब सुनिए 2011 में विदेशी कंपनियों के संबंध में जारी अपनी रिपोर्ट में अजीत डोभाल ने क्या लिखा था

वैश्विक वित्त बाजार में बिना रुकावट और पड़ताल के परिचालित और प्रभुत्व रखने वाले करमुक्त काले धन पर नजर डालने की आवश्कता है. यह एक ऐसा धन है जिसके स्वामी या स्रोत का पता नहीं होता. इस धन को टैक्‍स हेवन के माध्यम से आधिकारिक वित्त बाजार में प्रवेश कराया जाता है. ये टैक्‍स हेवन ऐसे देश होते हैं जो पूंजी को आकर्षित करने के लिए कर या लेवी नहीं लगाते. विश्व मानचित्र में ये छोटे आकार के हैं लेकिन संपूर्ण विश्व पर पकड़ रखते हैं....यह धन कर चोरी तो होता ही है साथ में इस पर किसी का पर्यवेक्षण नहीं होता. ”

तो साहब, रिपोर्ट लिखने में जो जानकारी जुटाई थी, उन्हीं के सहारे अपने बेटे का धंधा चमकाने का भी काम कर दिया? 

डोभाल साहब के दो बेटे हैं -शौर्य और विवेक। विवेक GNY Capital के निदेशक हैं। और शौर्य सिंगापुर की एसेट मैनेजमेंट कंपनी टॉर्च इंवेस्टमेंट मैनेजमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं और इंडिया फाउंडेशन के निदेशक. इस फाउंडेशन की किस्मत केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद चमक गई।

इस संस्था ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में होने वाले कार्यक्रमों का आयोजन किया है. और सरकार की करीबी सलाहकार मानी जाती है। बीजेपी के कई मंत्री इंडिया फाउंडेशन के निदेशक हैं। 

विवेक और शौर्य के कारोबार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। बड़े भाई के लिए काम करने वाले कई लोग छोटे भाई के लिए भी काम करते हैं। 

एक रिपोर्ट के अनुसार डॉन डब्लू. ईबैंक्‍स और मोहम्मद अल्ताफ मुस्लिअम वीतिल भी इसके निदेशक हैं. ईबैंक्‍स का नाम पेराडाइस पेपर्स में भी आया था.

जीएनवाई एशिया फंड के कानूनी पते के अनुसार, यह वॉर्क्‍स कारपोरेट लिमिटेड से संबंधित कंपनी है जिसका नाम पनामा पेपर्स में आया था. इस कंपनी का नाता सऊदी अरब के शाही ख़ानदान की कंपनी से भी है।

हिंदू-मुस्लिम के प्राइम डिबेट्स में उलझे हमारा ध्यान इन रिरोर्ट्स की तरफ जा नहीं पाता। कभी पीएम मोदी के साये अमित शाह के बेटे की फसल लहलहाती है तो कभी बीजेपी सरकार के खास डोभाल साहब के बेटे की। क्या किसानों की आत्महत्याओं को सरकार के करीबियों के बढ़ते जायज़ नाजायज़ कारोबारों से जोड़कर देखा जाना चाहिए? क्या पाँच सालों बाद अब पीएम मोदी को अपने चुनावी नारों की विवेचना करनी चाहिए? 

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