Institute of Eminence - विज्ञापन का एक और तरीका!
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Institute of Eminence - विज्ञापन का एक और तरीका!

Author: Neeraj Jha calender  12 Jul 2018

Institute of Eminence - विज्ञापन का एक और तरीका!

मणिपुर विवि में छात्र छात्राएँ पिछले 40 दिनों से हड़ताल पर और दो दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और HRD मंत्री Institute of Eminence का राग आलाप रहे हैं। Institute of Eminence - मतलब वो संस्थान जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व क्रांति लाकर विश्व भर में देश का नाम रोशन करेंगे। इनसे उम्मीदें हैं कि अगले दस वर्षों में ये विश्व के सर्वोत्कृष्ठ 500 संस्थानों में शामिल हो पाएँगे। सरकारी संस्थानों को इसके तहत सरकारी फंड मुहैया कराया जाएगा जबकि प्राइवेट संस्थान अपनी फंडिंग के दम पर ये माइलस्टोन हासिल करेंगे। 

अपने ही लक्ष्य को कम कर मील का पत्थर स्थापित करने की बात

एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट में छह संस्थानों जिन्हें इस सूची में रखा गया है के नाम सांझा करते हुए लिखा कि यह कदम मोदी सरकार के कामों में मील का पत्थर साबित होगी। शायद प्रकाश जावड़ेकर बजट को ध्यान से नहीं पढ़ते। या हो सकता है उनकी याद्दाश्त कमज़ोर रही हो। दरअसल 2016 का बजट पेश करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि उनका मकसद दस सार्वजनिक और दस निजी संस्थानों को वैश्विक स्तर का बनाना है। प्रकाश जावड़ेकर से सीधा सवाल यह है कि क्या अपने ही लक्ष्य को कम कर देना मील का पत्थर लैंडमार्क स्टेप हो सकता है?

केवल काग़जों में मौज़ूद संस्थान भी इस लिस्ट में शामिल

दिलचस्प वे छह संस्थान भी हैं जो इस सूची में रखे गए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र में IIT D, IIT B, IISc, Benglore का नाम है जबकि निजी क्षेत्र में BITS Pilani, Manipur Academy for Higher Education और अनिर्मित केवल काग़ज़ों में मौजूद Jio Institute by Reliance Foundation है। वैसे, IIT D, IIT B और IISc, Benglore इस वर्ष टाइम्स हाइयर एजुकेशन की रैंकिंग में शीर्ष 600 विवि की सूची में शामिल हैं। BITS Pilani विश्व के शीर्ष संस्थानों में 800-1000 रैंक में शामिल है। इसके अलावा इस सूची में एक ऐसा संस्थान भी शामिल है जिसके पास फिलहाल इमारत तक नहीं है - Jio Institute by Reliance Foundation. इस नाम को देखकर बहुत पुराना गाना बरबस ही मन में आता है - ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे….।

Institute of Eminence का लक्ष्य - रैंकिंग सुधारना

ख़ैर, प्रकाश जी के ट्वीट्स को पढ़कर स्पष्ट हुआ कि Institute of Eminence का कंसेप्ट केवल रैंकिंग सुधारने के लिए लाया गया है। यद्यपि इन संस्थानों की शिक्षा की गुणवत्ता भी वैश्विक स्तर की होगी, लेकिन जिन छह संस्थानों को इस सूची में रखा गया है क्या वह देश की बढ़ती हुई जनसंख्या की मांगों को पूरा कर पाएगी? केवल एक से सवा फ़ीसदी छात्र छात्राएँ इन संस्थानों में पढ़ पाएँगे। बाकी निन्यानवे फ़ीसदी का क्या।

शिक्षा पर खर्च लगातार हो रहा है कम

2014 में शिक्षा का बजट, देश के कुल बजट का 6.15 थी, 2015 में 5.44, 2016 में 4.68 और 2017 में 3.71 हुई। USA, UK, Belgium, Austalia, South Africa जैसे देश इस मामले में भारत से कोसों आगे हैं। 

Institute of Eminence में शामिल सार्वजनिक संस्थानों को सरकार हर वर्ष 200 करोड़ रुपए देगी। उन्हें ऑटोनॉमी दी जाएगी निर्णयों की। अगर विश्व की टॉप यूनीवर्सिटीज़ की बात की जाए तो यह बजट कहीं आस पास भी नहीं भटकता। एनडीटीवी से मिले आंकड़ों के मुताबिक हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड विवि का एंडॉवमेंट फंड - 2.47 लाख करोड़, 1.82 लाख करोड़ और 1.70 लाख करोड़ रुपए हैं। 2016-17 के वित्तीय वर्ष में हार्वर्ड ने 33 हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए। न जाने 200 करोड़ रुपयों के सरकारी सहायता से क्या खास असर पड़ेगा। 

शिक्षा व्यवस्था में ढ़ेरों कमियाँ

दिल्ली विवि से लेकर देश के अन्य बड़े विवि में प्रोफेसर्स की कमी है। मणिपुर विवि में छात्र छात्राएँ पिछले 40 दिनों से हड़ताल पर बैठे हैं। रविवार को अलग-अलग विभागाध्यक्षों ने भी अपने अपने पद से इस्तीफ़ दे दिया और छात्र-छात्राओं के साथ खड़े हो गए। देश के अधिकतर विवि की कमोबेश यही स्थिति है। क्या इन स्थितियों से निबटते हुए इन विवि में शिक्षा के माहौल पर ध्यान दिया जाना अधिक ज़रूरी नहीं? 2017 में प्रकाश जावड़ेकर ने लोकसभा में ये कहा था कि दिल्ली विवि में 9000 प्रोफेसर्स को नियुक्त करेंगे। आजतक इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए। क्या यह ज़रूरी नहीं? ज़रूरी है लेकिन ऐसा कर देना सरकार को प्राइम टाइम में नहीं लाएगा। विज्ञापनों का ज्यादा अवसर नहीं देगा। प्रचार होगा रैंकिंग में जगह बनाने से। 

केवल एडवरटाइज़िंग है Institute of Eminence का मकसद

स्पष्ट है Institute of Eminence का मकसद शिक्षा के स्तर को सुधारना या उटाना नहीं बल्कि सरकार को विज्ञापन का एक और मौका प्रदान करना है। इसका एक और मकसद देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी को सहायता पहुँचाना भी हो सकता है। 

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