भगत सिंह - एक क्रांतिकारी विचारक!
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भगत सिंह - एक क्रांतिकारी विचारक!

Author: Adarsh Kumar calender  23 Mar 2018

भगत सिंह - एक क्रांतिकारी विचारक!

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के तमाम किस्से आपने सुने होंगे। चाहे वो हँसते-हँसते फांसी के फंदे पर झूलना हो या अंग्रेजों को धूल चटाना। भगत सिंह वीरता का पर्याय हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं भगत सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ कहानियाँ जो रोचक भी है और प्रेरक भी।

पेन और कंघे के लिए जेल में लगी होड़

भगत सिंह के फांसी का फरमान जारी होने के बाद पूरे जेल मे मातम का माहौल था। खुशी अगर कहीं थी तो र्सिफ भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव के चेहरों पर। फांसी से थोड़े दिन पहले बहुत से कैदियों ने बरकत से गुहार किया की फांसी के बाद भगत के सामान जैसे घड़ी, पेन, कंघी इत्यादी उन्हें दे दिया जाए ताकि वो अपनी आने वाली पीढ़ी को दिखा सकें कि वो भी भगत सिंह के साथ जेल मे रहे थे। बरकत भगत सिंह की कोठरी में गया और वहाँ से उनका पेन और कंघा ले आया। सारे क़ैदियों में होड़ लग गई कि किसका उस पर अधिकार हो। आखिर में ड्रॉ निकाला गया।

कांग्रेस नेता को समझाया इंकलाबियों का अर्थ

उस समय भगत सिंह के फांसी पर चढ़ने के फैसले को कई कांग्रेसी नेताओं बेवकूफी बताया। लेकिन भगत सिंह का मानना था की देश को अजाद कराने के लिए फांसी पर चढ़ना उस काल खंड की आवश्यकता थी। आज़ादी की लड़ाई को जितनी उर्जा की आवश्यकता थी उतनी उर्जा उनके प्राणो के आहुति दिए बगैर संभव नहीं था। युवाओं में जोश पैदा हो सके सिर्फ इसीलिए भगत सिंह हसते-हसते फांसी के फंदे पर झूल गए। एक बार पंजाब कांग्रेस के नेता भीमसेन सच्चर ने आवाज़ ऊँची कर उनसे पूछा था, "आप और आपके साथियों ने लाहौर कॉन्सपिरेसी केस में अपना बचाव क्यों नहीं किया। भगत सिंह का जवाब था, "इन्कलाबियों को मरना ही होता है, क्योंकि उनके मरने से ही उनका अभियान मज़बूत होता है, अदालत में अपील से नहीं।” और तब सब क़ैदी चुप हो चले थे।

जब एक मुस्लिम सफाई कर्मचारी से मँगवाया घर का खाना

कानून की नज़रों में सब समान हैं की बात संविधान लागू होने के बाद चली, लेकिन भगत सिंह की पूरी ज़िंदगी इस विचारधारा से प्रेरित थी। मनुष्यों से प्यार करने वाले भगत धर्म या जाति के बंधनों में कभी फँसे ही नहीं। टी-शर्ट पर भगत सिंह का फोटो छपवाये घूमने वाले युवा को शायद ही भगत सिंह के व्यक्तित्व को जानते हों। अत्यंत आत्मीय स्वभाव के भगत सिंह ने जेल के मुस्लिम सफ़ाई कर्मचारी बेबे से अनुरोध किया था कि वो उनके लिए उनको फांसी दिए जाने से एक दिन पहले शाम को अपने घर से खाना लाएं।

लड़कियाँ देती थी भगत पर जान

क्रांतिकारियों की टोली में मजाकिया राजगुरू ने तो एक बार कहा था कि  “हम चाहें तब भी लड़कियाँ हमे भाव नहीं देतीं, और एक ये (भगत सिंह) है कि जिसपर लड़कियां जान लुटाते फिरती हैं।” पर भगत सिंह कहते थे की “मै चाहता हूँ कि किसी चेहरे से प्रेम करूँ पर वक्त इजाजत नहीं देता। अगर अगला जन्म हुआ तो मैं चाहूँगा कि मेरी जिंदगी मेरे महबूब के कंधो पर सर रख कर गुजरे।”

गोली से क्रांति संभव नहीं

भगत सिंह का नाम बेशक हिंसा से जोड़ा जाता हो लेकिन मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश पर कुर्बान हो जाने वाले भगत, एक महान विचारक थे और अहिंसा के पक्षधर भी। भगत सिंह ने कहा था की सांडर्स को मारना हमारी गलती थी। गोली से क्रांति संभव नहीं है।

भगत सिंह की पूरी ज़िंदगी एक प्रेरणा स्रोत है। राष्ट्र और राष्ट्रभक्ति और जीवन जीने के तरीकों के बारे में भगत सिंह के विचार आजकल के गहन अंधकार में रोशनी के समान है।

By: Adarsh Kumar
adarsh@molitics.in

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