भारी संकट मे बीजेपी!
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भारी संकट मे बीजेपी!

Author: Neeraj Jha calender  19 Mar 2018

भारी संकट मे बीजेपी!

भगवान देता है तो छप्पर फाड़ के देता है पर जब लेता है तो भी उसी फटे हुए छप्पर से लेता है। पिछले 4 सालों में राजनैतिक ज़मीन पर बीजेपी के लिए इतने बुरे दिन कभी नहीं आए थे। ऐतिहासिक 282 सीटों के साथ सत्ता में आई बीजेपी शासन के 4 सालों के अंदर 274 सीटों पर आ गई है। उपचुनावों के परिणामों का दुख झेलने के दूसरे ही दिन बीजेपी को एक और झटका लगा - आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडु ने एनडीए से किनारा कर लिया। YSR Congress अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस सब्मिट की जिसके तुरंत बाद TDP ने इसके समर्थन की बात कही। कांग्रेस, AIADMK, AAP, AIMM ने भी इस अविश्वास प्रस्ताव को सपोर्ट किया है।

वक़्त को लाजवाब कोई नहीं कर सकता। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि १४ तारीख के लिए मायावती और अखिलेश को डॉक्टर बुलवा कर रखना चाहिए। हालात सबके सामने हैं। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के गृह क्षेत्रों में पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। योगी आदित्यनाथ इन उपचुनावों को 2019 के आम चुनावों की ड्रैस रिहर्सल बता रहे थे। खैर, उपचुनावों के परिणामों से बीजेपी के थिंक टैंक के दिमाग की नसें टाईट हो गई होंगी और टीडीपी के अलग होने के बाद हालत थोड़ी और खराब हो गई होगी।

बहरहाल, चुनावों के परिणाम ज्यादा खराब इसलिए भी हैं क्योंकि ये गोरखपुर और फूलपुर में मिली है। वे क्षेत्र जहां से योगी खुद और उपमुख्यमंत्र मौर्य चुने जाते हैं।

गवर्नेंस
1 साल पुरानी योगी सरकार से जनता को काफी उम्मीदें थी। लेकिन योगी आदित्यनाथ उन उम्मीदों पर खड़े उतरते नहीं दिख रहे। उनका एक साल एक विचारधारा के पोषण में बीत गया। फिर चाहे ताजमहल का मामला हो या इमारतों को भगवामय करने का। योगी ने अपनी छवि के मुताबिक काम करने की कोशिश की।

बच्चों की मौत और गैर ज़िम्मेदाराना बयान
गोरखपुर के अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौत और उसके बाद योगी का गैर जिम्मेदाराना बयान भी इस परिणाम का कारण रहा। लोगों में असंवेदनशील सरकार के प्रति गुस्सा और आक्रोश था।

मंदिर से बाहर का उम्मीदवार
पिछले 30 सालों से गोरखपुर से संसद पहुँचने वाले अवैद्यनाथ और आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर से संबंध रखते थे। लेकिन इस बार बीजेपी उम्मीदवार मंदिर से बाहर का व्यक्ति था। इस कारण से भी बीजेपी को क्षेत्र में कम वोट मिले। गोरखपुर के लोकल बूथ में सपा को १७००, भाजपा को ४३ और कांग्रेस को वोट मिले।

SP - BSP अलायंस
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी का एक साथ आना भी बीजेपी के लिए नुकसान का कारण साबित हुआ। दलित, मुस्लिम और ओबीसी वोटर लगभग पूरी तरह से अलग हो गए। इसके अलावा ब्राह्मण वोटबैंक ने भी पूरी तरह से योगी का साथ नहीं दिया

अहंकार
राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश में बयानबाजियों के द्वारा जिस अहंकार का परिचय बीजेपी नेता दे रहे हैं, वह आम जनता में उनके प्रति एक दूरी बनाता है। साथ ही, अहंकार के कारण बीजेपी उस तरह की मेहनत गोरखपुर या फूलपुर में नहीं कर पाई, जैसा अमूमन चुनावों में करती है।

जब आपके सामने विपक्षी के रूप में कोई दल नहीं होता तब विपक्ष में जनता होती है। ऐसे में जनता की संवेदनाओं का ख्याल न रखना वह गलती है, जो सत्ता की बुनियादों को हिला देता है।

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