चिदंबरम मामले में बोले सिंघवी- बेल न मिलने से नहीं ठहराया जा सकता दोषी
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चिदंबरम मामले में बोले सिंघवी- बेल न मिलने से नहीं ठहराया जा सकता दोषी

By Aaj Tak calender  23-Aug-2019

चिदंबरम मामले में बोले सिंघवी- बेल न मिलने से नहीं ठहराया जा सकता दोषी

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को लगातार तीसरे दिन तीसरी अदालत से निराशा हाथ लगी है. आईएनएक्स मीडिया मामले में भ्रष्टाचार का सामना कर रहे चिदंबरम को विशेष अदालत ने 26 अगस्त तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया है. हालांकि शुक्रवार को भी सुप्रीम कोर्ट में उनकी अर्जी पर सुनवाई है, इसके बाद फिर 27 अगस्त को भी मामले की सुनवाई होगी. लेकिन गुरुवार को जिस तरह से सीबीआई ने दलीलें पेश की हैं उससे चिदंबरम के वकीलों की धड़कन बढ़ी हुई है.
आईएनएक्स मीडिया केस में विशेष अदालत ने चिदंबरम को 26 जुलाई तक यानी सोमवार तक सीबीआई की रिमांड में भेज दिया है. डेढ़ घंटे तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा कि मौजूदा हालात और तथ्यों को देखकर रिमांड पर भेजना ही सही है. जिसके बाद चिदंबरम को सीबीआई की टीम तुरंत अपने मुख्यालय लेकर आ गई.

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चिदंबरम को बचाने के लिए कांग्रेस के बड़े वकील लगे हैं. कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नामी वकीलों ने स्पेशल कोर्ट में अपनी दलीलें रखीं लेकिन कोर्ट के ऑर्डर के बाद ये साफ हो गया है कि सीबीआई की दलीलें ही वजनदार रहीं. हालांकि चिदंबरम के वकीलों और कांग्रेस नेताओं ने कोशिश करने और दलील पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
अभिषेक मनु सिंघवी ने आजतक से बातचीत में कहा कि केस में हार-जीत लगी रहती है, यह कानूनी प्रक्रिया है. सिंघवी ने कहा कि कोर्ट जाना और जमानत मांगना मानवाधिकार है. फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है और अगर सुप्रीम कोर्ट में भी हार गए तो सीबीआई रिमांड काटेंगे. अभिषेक सिंघवी ने कहा कि जिस तरह बेल मिलने के बाद व्यक्ति निर्दोष नहीं होता उसी तरह बेल की मनाही से इंसान को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे.  नहीं होते उसी तरह जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी दोषी नहीं होते.
CBI की वो दलीलें जिन पर चिदंबरम को मिली रिमांड
-चिदंबरम के खिलाफ गैरजमानती वॉरंट था,  इसलिए उनको गिरफ्तार किया गया.
-गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर चिदंबरम को कोर्ट में पेश किया.
-चिदंबरम ने पद का दुरुपयोग किया और ये मामला 50 लाख डॉलर यानी करीब 36 करोड़ रुपये के लेनदेन का है.
-चिदंबरम जानबूझ कर सवालों पर चुप्पी साधे रहे और असहयोग करते रहे.
-हाईकोर्ट ने उनकी अंतरिम ज़मानत खारिज की है.
-इतने बड़े वित्तीय घोटाले की जांच बिना पूछताछ के संभव नहीं.
इस पूरी अदालती कार्रवाई के दौरान कोर्ट में चिदंबरम की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने भी उनका पक्ष रखा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि चिदंबरम ने महज मंजूरी दी थी, जबकि फैसला एफआईपीबी के 6 सदस्यों ने लिया था. उन्होंने इंद्राणी मुखर्जी के बयान के बाद चिदंबरम को सम्मन जारी करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए. बता दें कि चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए एफआईपीबी की मंजूरी देने के आरोपी हैं.

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