Jharkhand Assembly Election 2019: चुनाव से पहले बिखरे कुनबे को सहेजने में जुटे बाबूलाल
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Jharkhand Assembly Election 2019: चुनाव से पहले बिखरे कुनबे को सहेजने में जुटे बाबूलाल

By Jagran calender  22-Aug-2019

Jharkhand Assembly Election 2019: चुनाव से पहले बिखरे कुनबे को सहेजने में जुटे बाबूलाल

लोकसभा चुनाव में करारी हार मिलने तथा पार्टी के भीतरखाने चल रही उठापटक ने झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी को हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद विधानसभा की आठ सीटें फतह कर झाविमो ने खुद को संभालने की कोशिश की थी, परंतु उनमें से छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए। शेष दो में से एक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के कारण झाविमो ने जहां निलंबित कर रखा है, वहीं पार्टी के प्रधान महासचिव प्रदीप यादव पार्टी की ही एक नेत्री के साथ दुव्र्यवहार मामले में सलाखों के पीछे हैं। अब जबकि विधानसभा चुनाव सामने है, झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने दल की सांगठनिक मजबूती की कवायद तेज कर दी है।
पार्टी से ढाई लाख नए सदस्यों को जोड़ा गया
बुधवार को मीडिया से मुखातिब बाबूलाल ने दावा किया कि पार्टी से ढाई लाख नए सदस्यों को जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है, जो समय से पूर्व है पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि झाविमो गठबंधन का पक्षधर है। वक्त आने पर सीट शेयरिंग के फार्मूले पर चर्चा होगी। इस दौरान उन्होंने भाजपानीत झारखंड सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि वे जनता की अदालत में सरकार की तमाम खामियों को ले जाएंगे। एक-एक कर सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करेंगे। मरांडी ने इस दौरान मोमेंटम झारखंड को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि इसके नाम पर सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई के 900 करोड़ रुपये लुटाने का काम किया है।
सरकार जारी करे श्‍वेत पत्र
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि खुद को डबल इंजन की सरकार कहने वालों को इस आशय का श्वेत पत्र जारी करना चाहिए कि साढ़े तीन लाख करोड़ के निवेश की बात कहने वाली सरकार ने कितने नए उद्योग खोलने में सफलता पाई? कोलकाता, बंगलुरू, सिंगापुर, मुंबई आदि में रोड शो के क्या परिणाम आए? सरकार यह भी बताए कि लगभग पांच वर्षों की अवधि में कितने उद्योगों पर ताला लटक आया और वे बंद क्यों हुए? आदित्यपुर, गिरिडीह, रामगढ़ आदि क्षेत्रों में उद्योग-धंधों के बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। नोटबंदी, जीएसटी, भ्रष्टाचार आदि ने आम जनों का जीना मुश्किल कर दिया है। कमजोर लोगों पर कानून और पावरफुल लोगों का कानून पर दबदबा है।

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